गुरु चरणों के समीप चद्रप्रभ सागर महाराज
क्या खूब लिखा है किसी ने कोई शिष्य गुरु चरणों मे जब सर को झुकाता है
परमात्मा खुद आकर उसे गोदी में बिठाता है
यह छाया चित्र देख मन अभिभूत हो जाता है मन भावुकता से भर जाता है जिन्हें हम इस धरा के साक्षात भगवान ही कहेंगे आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज के समीप में साधना तप की प्रतिमूर्ति चन्द्रप्रभ सागर महाराज मुनि श्री चंद्रप्रभ साग़र महाराज एक अलोकिक शिष्य उदाहारण प्रस्तुत कर रहे है। स्वयं गुरु चरणों मे समर्पित रहकर शिष्यत्व की प्रतिमूर्ति परिलक्षित करता है हम तो अपने को धन्य मानते है जो ऐसे शिष्य की चरण रज पावन सानिध्य हमको मिला क्या खूब कहा गया
कलयुग में सदयुग के जैसी शिष्य मंडली प्यारी
गुण रत्नाकर विद्यासागर मंगल दीपक हाथ लिए
सचमुच गुरुवर ने गुरुकुल की पद्वति का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया जो किसी कीर्तिमान व आतिशय से कम नही आका जा सकता। हर कोई बस ऐसी साधना की प्रतिमूर्ति को बस एक टक देखता ही रहता है।
आप सभी से कहूंगा
जागो नींद त्यागो सीख सुनो सन्तो की
इन सन्तो में झलक अरिहंतो की
किंचित भी भेद नही तनिक मन में
अदभुत जाग्रति है कण कण में
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
