सत्य बोलने वाले की प्रशंसा होती है, असत्य हानिकारक होता है ऐलक श्री क्षीरसागर महाराज पूज्य श्री की आहारचर्या का सौभाग्य विनोद कुमार विनय कुमार विनायका को मिला

धर्म

सत्य बोलने वाले की प्रशंसा होती है, असत्य हानिकारक होता है ऐलक श्री क्षीरसागर महाराज पूज्य श्री की आहारचर्या का सौभाग्य विनोद कुमार विनय कुमार विनायका को मिला
रामगंजमंडी
10 लक्षण पर्व की बेला पर शनिवार को उत्तम सत्य धर्म की पूजा की गई। एवं तत्वार्थ सूत्र के पंचम अध्याय का वर्णन किया गया।
श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पूज्य ऐलक श्री क्षीरसागर महाराज द्वारा उत्तम सत्य धर्म पर प्रकाश डाला गया। व्यक्ति लोभ कषाय के कारण सत्य नहीं बोलता है। उन्होंने कहा कि सत्य बोलने वाले की सब जगह प्रशंसा होती है। असत्य बोलना हानिकारक होता है। सत्य बोलना लेकिन हित मित प्रिय वचन बोलना। चाहिए। उन्होंने कहा कि झूठ से बचने वाले सत्य वचन बोलो और ऐसे सत्य से बचो जो पीड़ा कारक हो अगर व्यक्ति का आंतरिक सत्य से परिचित नहीं है तो वह वास्तविक सत्य नहीं हो सकता संसार में कुछ नित्य नहीं है सत्य है कि आना-जाना लगा हुआ रहता है। आज का व्यक्ति अनित्य पर विश्वास नहीं करता है और दुखों से भर जाता है परिवर्तन संसार का नियम है व्यक्ति स्वीकार नहीं कर पाता। और तनाव में आकर वह आत्मघात तक कर लेता है। कोई व्यक्ति कितना भी धनवान हो यदि वह अच्छे शब्दों का प्रयोग नहीं करता तो वह निम्न कहलाते हैं। और कोई व्यक्ति झोपड़ी में रहता है अच्छे शब्दों का प्रयोग करता है तो वह उच्च स्तर का कहलाता है हमें यह सोचना चाहिए क्या बोल रहे हैं क्यों बोल रहे हैं कितने बोलना है और कितना बोलना है। इस पर विचार कर करके हमें बोलना चाहिए। वास्तविक सत्य तो केवल ज्ञान से प्राप्त होता है और केवल ज्ञान से ही वास्तविक सत्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि रायचंद को अच्छा नहीं माना जाता और बिना सलाह के सलाह के कभी किसी को सलाह नहीं देना चाहिए बिना कारण बोलना अनीतिकारी हो सकता है और क्यों बोल रहे हैं बिना प्रयोजन के नहीं बोलना कोई ध्यान नहीं दे रहा है तो विपरीत स्थिति बन सकती है। इसलिए बिना प्रयोजन नहीं बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति बोले जा रहा है और सीमा नहीं है और क्या बोल रहा है उस पर विचार नहीं कर रहा है शुरू होने के बाद चुप नहीं होते हैं इतना बोलते हैं कि दूसरे को बोलने नहीं देते हैं ऐसे व्यक्ति गलत कहलाते हैं। हमें कितना बोलना विचार करना चाहिए। उन्होंने दूध और शक्कर का उदाहरण देते हुए समझाया कि दूध में शक्कर कितनी डालनी है उसका उसकी मात्रा का ध्यान रखा जाता है। यदि मात्रा का ध्यान नहीं रखा तो सब गड़बड़ हो जाएगा।इस प्रकार हमें सत्य बोलते समय भी ध्यान रखना चाहिए।

 

 

 

 

महाराज श्री ने कहा कि व्यक्ति को चार प्रकार के असत्य से बचना चाहिए है को नहीं कहना , नहीं को है कहना, होना कुछ और कहना कुछ, बिना किसी कारण कठोर कहना महाराज श्री ने कहा कि कभी भी निष्ठुर वचन नहीं कहना चाहिए निष्ठुर वचन असत्य की श्रेणी में आता है।

मंगल प्रवचन के बाद पूज्य महाराज श्री की आहारचर्या व चरण वंदना का लाभ विनोद कुमार विनय कुमार विनायका परिवार को मिला। सभी समाजजन भक्ति में मगन होकर दसलक्षण पर्व मना रहे है और कर्मो की निर्जरा कर रहे है। जिनालयों में भक्ति आस्था और श्रद्धा का सैलाब जमकर देखने को मिल रहा है। सुबह से ही जल्दी उठकर लोग मंदिर की ओर दौड़ने लगते हैं और धर्म ध्यान में मगन हो जाते हैं।

               
श्रीमहावीर दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष महेंद्र ठौरा एवम महामंत्री पदम सुरलाया ने बताया कि आज मंदिर जी में प्रथम अभिषेक शांतिधारा का पुण्य लाभ शकुन्तला के जन्म दिवस पर प्रेमचंद विपिन सरिता आनिया दिवा सबद्रा परिवार को एवम द्वितीय शांतिधारा का पुण्य लाभ आनवी के जन्म दिवस पर इन्द्रा सुनील अमिता विवान सुरलाया को प्राप्त हुआ

             

 

संध्याकाल में महाआरती का सौभाग्य मनोहर बाई शरद सीमा दिव्यांशु बाबरिया परिवार को मिला दशलक्षण महामंडल विधान के पश्चात पुष्पदंत भगवान की मोक्ष कल्याणक की पूजन कर निर्वाण लड्डू चढ़ाया गया।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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