गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा, भक्ति व समर्पण श्रेष्ठ होनाश्रेष्ठ होना चाहिए : मुनिश्री विनम्र सागर महाराज 

धर्म

गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा, भक्ति व समर्पण श्रेष्ठ होनाश्रेष्ठ होना चाहिए : मुनिश्री विनम्र सागर महाराज 

बागीदौरा कस्बे में विनम्र सागर जी  महाराज ससंघ आचार्य विद्यासागर संयम भवन मेँ विराजमान हैं। सुबह से शांतिधारा का सौभाग्य कमलकांत से सोहनलाल दोसी को प्राप्त हुआ। इसके बाद आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवम आचार्य श्री समयसागर जी की संगीतमय भक्तिमय महापूजन की गई।

 

 

 

 धर्मसभा में मुनिश्री 108विनम्र सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि चार प्रकार के लोग होते हैं। पहले, जो व्यवहार औरमन दोनों से अच्छे होते हैं। ये हितैषी,करुणावान और धर्म के मर्म कोसमझने वाले होते हैं। दूसरे, जोव्यवहार से बुरे लेकिन मन से अच्छे होते हैं। इनके मन में पाप, राग-द्वेष नहीं होता, पर वाणी और व्यवहार खटकता है।तीसरे, व्यवहार और मन दोनों से बुरे होते हैं। ये धर्म कार्य में बाधा डालते हैं। चौथे, जो व्यवहार से अच्छे लेकिन अंतरंग से बुरे होते हैं। इनसे हमेशा बचना चाहिए। ये कहने को शुभचिंतक होते हैं, लेकिन जैसे ही हमारा भला होता है, इन्हें चिंता लगती है। ऐसे लोगों को पहचानकर सतर्क रहना जरूरी है।

 

मुनिश्री ने कहा समय कैसा भी हो,यदि गुरु सच्चे हो उनके प्रति श्रद्धा भक्ति और समर्पण श्रेष्ठ हो, तो सारे काम बनते चले जाते है इसलिए गुरु और उनके वचनों के प्रति आस्था प्रगाढ़ करनी चाहिए।

      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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