प्रेरक वचन“आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज पुराने ज़माने में लोग एक-दूसरे की हिम्मत बढ़ाते थे, और आजकल लोग ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं।”
जहाजपुर
अहिंसा संस्कार पदयात्रा के दौरान प्रेरक संदेशस्थान: जहाजपुर, राजस्थानअवसर: दीक्षा भूमि परतापुर (बांसवाड़ा) की ओर प्रगतिशील अहिंसा संस्कार पदयात्राअन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज ने उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए अत्यंत प्रेरक उद्बोधन प्रदान किया।
प्रेरक वचन
“पुराने ज़माने में लोग एक-दूसरे की हिम्मत बढ़ाते थे, और आजकल लोग ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं।”इस मार्मिक वाक्य के माध्यम से आचार्य श्री ने वर्तमान सामाजिक स्थिति पर व्यंग्य करते हुए जीवन में सकारात्मकता अपनाने का संदेश दिया।उन्होंने कहा—“कथनी से करनी कठिन अवश्य है, परंतु सच्चा वक्ता वही है जिसकी कथनी और करनी एक हो।”पंडितों और नेताओं के भाषण प्रायः लोगों के कानों तक सीमित रह जाते हैं।किंतु साधु-संतों के वचन हृदय में उतरकर जीवन-परिवर्तन का कारण बनते हैं।यदि आचार और उच्चार में अंतर है, तो सुनना और बोलना—दोनों ही व्यर्थ हैं।


आदर्श जीवन का महत्व
आचार्य श्री ने स्पष्ट किया—
जब तक हम स्वयं आदर्शों के अनुरूप जीवन नहीं जीते, तब तक आदर्शों की चर्चा उस चित्रित पुष्प के समान है, जिसमें सौंदर्य तो है, पर सुगंध नहीं।उन्होंने कहा कि—संत दर्पण के समान होते हैं।
उनके आचरण में हम अपनी कमजोरियाँ, भूलें और अपराध देख सकते हैं।सच्चा संत वही है जिसके वचन और आचरण में सामंजस्य हो।जिसके उच्चारण और आचरण में खाई है, वह समाज का पथप्रदर्शक नहीं हो सकता।


🚩 पदविहार का विवरण (23 फरवरी 2026)
प्रस्थान: प्रातः 6:30 बजेराजकीय विद्यालय, भरनी (जिला भीलवाड़ा, राजस्थान)गंतव्य: दिगंबर जैन मंदिर, पारोली (लगभग 11 कि.मी. पदविहार)सायंकालीन कार्यक्रम:अतिशय क्षेत्र चँवलेश्वर पार्श्वनाथ, जिला भीलवाड़ा में भव्य मंगल प्रवेशयह मंगल पदविहार चतुर्विध संघ की उपस्थिति में श्रद्धा, अनुशासन और अहिंसा संस्कार का प्रेरणादायक उदाहरण बना।
संदेश का सार
जीवन में वचन और आचरण की एकरूपता आवश्यक है। दूसरों का मनोबल बढ़ाएँ, तनाव नहीं।प्रवचन केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए होते हैं।संतों का सान्निध्य आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन का अवसर है।
प्राप्त जानकारी: नरेंद्र अजमेरा, पियुष कासलीवाल (औरंगाबाद)
संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312
