कमाए हुए धन को धर्म में लगाने से उस धन की सार्थकता है योग सागर महाराज

धर्म

कमाए हुए धन को धर्म में लगाने से उस धन की सार्थकता है योग सागर महाराज
रहली
निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योग सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि भगवान की भक्ति और तपस्या करने से अतिशय पुण्य औरअंतरंग लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। लोभ करने से कोई लाभ प्राप्त नहीं होसकता है। प्रत्येक क्रिया

विवेकपूर्ण करना चाहिए, तभी फल मिलेगा।ज्यों-ज्यों लाभ होता है त्यों-त्यों लोभ बढ़ता जाता है।कहा धन कमाने में कभी पुण्य नहीं मिलता, पाप मिलता है। कमाए हुए धन को धर्म में लगाने से उस धन की सार्थकता है।जो भाग्य और पुरुषार्थ से मिला है, उसमें संतोष रखो, इसी संतोष से ही शौच धर्म प्रकट होता है।

 

 

 

दशलक्षण पर्व पर बजरिया स्थित जैन धर्मशाला मेंसामूहिकपूजन के मौके पर धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। मुनि श्री निरामय सागर महाराज ने कई दृष्टांतों केमाध्यम से उत्तम शौच धर्म कोसरलता से समझाया, उन्होंने कहा कि रत्नत्रय के माध्यम से शरीर पवित्र बनाया जा सकता है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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