आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने” जेल में कैदियों को किया संबोधित अच्छे दिन पता नहीं चलते और बुरे दिन काटे नहीं कटते” आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज 

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आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने” जेल में कैदियों को किया संबोधित अच्छे दिन पता नहीं चलते और बुरे दिन काटे नहीं कटते” आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज                                     विदिशा परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने जेल में जाकर कैदियों को संबोधित किया इसकी जानकारी देते हुएप्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया अपरान्ह 4 बजे आचार्य श्री संघ सहित अरिहंत विहार से केन्द्रीय जेल पहुंचे एवं वहा पर कैदियों को संबोधित करते हुये कहा कि”जगत से आंख बंद होगी तभी आप जीवन के लिये कार्य कर पायेंगे”जो पाप आपने शरीर से किया है उस पाप को मन से धोकर साफ कर सकते हो, उन्होंने कहा कि यह बात अपने मन से निकाल दो कि हम अपराधी है,जब तुमसे अपराध हुआ था वह क्षण निकल चुका है इस संसार में आप ही अकेले अपराधी नहीं हो जो करता दिख गया वह अपराधी,जो मन से पाप करता दिख गया वह पापी अपराधी को सजा संसार की इस जेल में मिल रही है, लेकिन जो पाप आपके मन से हुआ है उसकी सजा तो कर्मों की जेल में भुगतना ही पड़ती है।

उन्होंने सीधी और सरल भाषा में समझाते हुये कैदियों से पूछा जब आपके सफेद कपड़ों में मल चिपक जाता है तो आप उसे पानी से धोते हो उसी प्रकार कर्मों का जो मल आपकी वाणी और व्यवहार से हो गया है उसे आप भगवान का नाम लेकर धो सकते हो उन्होंने कहा कि जिस मन ने आपसे पाप कराया है, उसी मन से आपने यदि भगवान का नाम ले लिया तो कर्मों की निर्जरा कर आप भी साधु बन नसकते है उन्होंने कहा कि अपराधी व्यक्ति अंदर से नहीं होता अपराध बाहर से ही आता है,

उन्होंने एक कथन के साथ समझाया कि सबके दिन एकसे नहीं होते,सब दिन एक से नहीं रहते”* उन्होंने एक कथानक सुनाते हुये कहा कि एक डाकू से संत ने पूछा जाओ अपने परिवार से पूछ कर आओ हमने यह पाप परिवार के खातिर किया क्या आप हमारे दंड में शामिल है तो परिवार के सभी सदस्यों ने मना कर दिया तो संत ने कहा कि “विचार” करें कि सभी को अपने अपने कर्मों का दंड स्वं ही भुगतना पड़ता है। 40 मिनट के उदबोधन में आचार्य श्री ने कहा कि यहा पर जितने भी लोग है सभी हमारे ही भाई बंधु है किसी ने लोभ में आकर या किसी दूसरों के बहकावे में आकर पकड़े गये अब अपने समय का सदुपयोग करो और जब यहा से निकलो तो बदला लेने की इच्छा से नहीं बल्कि अपने आपको बदल लेंने की भावना से निकलना और सबसे पहले आप एक रुपया अवश्य ऐसे लोग को दान करना जिसको उसकी आवश्यकता हो उन्होंने कहा कि मात्र जीवन जीना श्रेष्ठ नहीं है श्रद्धा और विश्वास का जीवन जीना श्रेष्ठ है।

 

 प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया उपरोक्त कार्यक्रम इंजीनियर सोसायटी विदिशा चेप्टर के सहयोग से जेल प्रशासन द्वारा रखा गया था इस अवसर पर जेल अधीक्षक प्रियदर्शन श्री वास्तव ने संबोधित करते हुये आचार्य श्री एवं मुनिसंघ के पधारने के लिये आभार व्यक्त कियातत्पश्चात मुनिसंघ ने जेल परिसर से निकल कर श्री पारसनाथ जिनालय रामद्वारा के दर्शन करते हुये शीतलधाम की ओर विहार किया स्थान स्थान पर श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री संघ के पाद प्रक्षालन किये ।आचार्य श्री संघ ने शीतलधाम पहुंचकर मूलनायक भगवान आदिनाथ स्वामी के दर्शन किये तथा निर्माणाधीन समवसरण मंदिर एवं श्री आदिनाथ जिनालय तथा सहस्त्रकूट जिनालय का अवलोकन किया इस अवसर पर शीतल विहार न्यास के समस्त टृस्टी गण एवं पदाधिकारियों ने आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन किये। 

 

शीतल धाम हरिपुर में बनने वाला यह जिनालय वर्षों तक जयवंत रहेगा आचार्य श्री।                                                   आचार्य श्री ने संबोधन देते हुये कहा कि शीतलधाम हरीपुरा में बनने बाला यह जिनालय हजारों वर्षों तक जयवंत रहेगा उन्होंने कहा कि जितनी चिंता आपको बाहर की होती है उतनी चिंता यदि आप अपनी कर लोगे तो आपका यह जीवन सार्थक हो जायेगा उन्होंने सभी बुजुर्गों से कहा कि अंतिम श्वांस यदि कलुषित भावना से निकले उसके पहले यह घर को छोड़कर निकल जाना इस अवसर पर उन्होंने पदाधिकारियों को कहा कि यह समवसरण और सहस्त्रकूट जिनालय का निर्माण जल्दी कर लो जिससे यहा पर जो बुजुर्ग है वह भी जाते जाते भगवान का अभिषेक कर लें।कार्यक्रम उपरांत आचार्य श्री संघ का मंगल विहार अरिहंत विहार की ओर हुआ। संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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