जब तक खुद का मन कैकेयी ना हो तब तक कोई मंथरा तुम्हारे कान नहीं भर सकती प्रसन्न सागर जी महाराज
दिल्ली गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि जब तक खुद का मन कैकेयी ना हो.. तब तक कोई मंथरा,,तुम्हारे कान नहीं भर सकती है..!अक्सर जो जितने बड़े कद पद पर होते हैं, वो उतने ही कान के कच्चे और सन्देह से भरे होते हैं। ज्यादा सन्देह और जरूरत से ज्यादा टोका टाकी हमारे रिश्तों और अपनों को दूर कर देती है। क्योंकि संसार में जीना है, और साथ रहना है तो विश्वास और भरोसा तो करना ही पड़ेगा। विश्वास करना बुरा नहीं, अपितु अति विश्वास या अन्ध विश्वास करना घातक हो सकता है। बिना विश्वास के जीना ऐसा ही है जैसे बिन तेल की बाती, बिन पानी के मछली।
महाराज श्री ने उदाहरण के माध्यम से बताया कि यदि आपको कहीं जाना है तो — ड्राइवर पर,, बाल कटवाना है तो — नाई पर,, वस्त्र सिलवाना है तो — दर्जी पर,, भोजन करना है तो — हलवाई पर,, भरोसा करना ही पड़ेगा। अन्यथ: जी नहीं पाओगे। आज का माहौल ऐसा बन गया है कि हम किस पर विश्वास करें,, किस पर नहीं।पीठ और छाती के दोनों ओर कातिल खड़े हैं। पहले के लोग पीछे से वार करते थे, आज के लोग देखते ही देखते सामने से आपको निपटा देते हैं।

महाराज श्री ने कहा मैं जानता हूं– एक बेटी को जिसने अपने प्यार के स्वार्थ में पिता के चाकू से अनेक टुकड़े करके कमोड में फ्लश कर दिया। एक पिता का सबसे भरोसेमंद बेटा, अपने दोस्त को पैसे देकर पिता को गोलियों से छलनी करवा देता है। किस पर विश्वास करें-? सिर्फ दो पर ही भरोसा करो — एक खुद पर, और दूसरा खुदा पर (यानि परमात्मा पर)। यदि इन दो पर पूरा भरोसा किया तो दूसरों पर सन्देह और विश्वास की समस्या आपोआप मिट जायेगी। हमेशा सन्देह ना करें, जिस पर विश्वास किया है। यदि विश्वास टूट गया तो क्या होगा-? भरोसे में धोखा मिल जाये पर सन्देह करेंगे तो अपने व्यक्ति का विश्वास भी खो देंगे।


इसलिए अपने आप पर भरोसा करो और मन को हल्का करके जीवन जियो। क्योंकि -रंग छोड़ते कपड़े,, और रंग बदलते लोग कितने भी ब्राण्डेड हो, आखिर दिल और मन से उतर ही जाते हैं…!!!
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
