जो सबका मंगल करती वह है माँ स्वस्ति
अपने नाम गुणों को वो सार्थक करती
दोनो हाथो से मुस्कान के साथ आशीष को बरसाती
जन जन का मंगल करने वाली
बड़ा ही महत्व को समझाने वाली
साधना संयम की प्रतिमूर्ति
इन्ही के पावन सानिघ्य से पुलकित है गुलाबी नगरी
नमन गुरु माँ स्वस्ति
गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी को समर्पित भावाभिव्यक्ति
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
