भगवान आदिनाथ के मोक्ष कल्याणक पर हुआ मस्तकाभिषेक,चढ़ाया निर्वाण लाडू,1008 कलशों से किया जलाभिषेक, वार्षिक मेले में पहली बार तीन आचार्यों का मिला सानिध्य
बड़वानी बावनगजा से दीपक प्रधान की रिपोर्ट
विश्व प्रसिद्ध दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जहां पर की विश्व की सर्वोच्च उत्तुंग 84 फिट ऊंची भगवान आदिनाथ की प्रतिमा पर आज माघ कृष्ण चतुर्दशी को भगवान के 1008 कलश से जलाभिषेक कर महा मस्तकाभिषेक किया गया,हजारों श्रावक श्राविकाओं के बीच भगवान के और आचार्य श्री के गगन भेदी नारों से पूरा क्षेत्र धर्म की बयार में बह गया,आज प्रातः तलहटी मंदिर में भगवान के अभिषेक शांतिधारा नित्य नियम की पूजन संपन्न हुई और मुनि संघ की आहार चर्या संपन्न हुई, उसके बाद सभी आचार्य संघ और अन्य विराजित त्यागी वृत्तियों की आहार चर्या संपन्न हुई,फिर तलहटी से बड़े बाबा तक भव्य शोभा यात्रा बैंड बाजों के भक्ति नृत्य के साथ निकाली गई ,
पहाड़ के नीचे सभी पुण्यार्जक परिवार का बहुमान सम्मान किया गया जिसमें प्रथम कलश पुण्यार्जक नेमि कुमार जी जैन मुंबई,निर्वाण लाडू पुण्यार्क दिनेश जैन कठलाल गुजरात, विधान पुण्यार्जक अशोक जी विनोद जी दोषी परिवार बाकानेर ,शांति धारा पुण्यार्जक अनिल जी सुनील जी जैन जैनको ,शरद कुमार शांतिलाल कोटड़िया,गजेन्द्र जी मीना जी झांझरी बड़ौदा,महेंद्र पाटनी टोकी,ध्वजारोहण करता स्नेहलता जी तेज कुमार जी विनायका उज्जैन का सम्मान अंग वस्त्र,तिलक ,माला के साथ समस्त आचार्य संघ के सानिध्य में संपन्न हुआ।

आचार्य श्री को शास्त्र भेंट और पाद प्रक्षालन का सौभाग्य जितेंद्र कुमार देवेंद्र कुमार गोधा बड़वानी को प्राप्त हुआ। सभा का संचालन विपुल गंगवाल ने किया ,ट्रस्ट कमेटी अध्यक्ष विनोद दोशी ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए क्षेत्र की होने वाली जानकारी सभी को सभा में प्रदान की ।






मुनिश्री प्रणुत सागर जी ने कहा कि हम सब ये कार्य भगवान की आज्ञा से संपन्न कर पा रहे है और उनके आशीर्वाद से ही यहाँ बैठे है और अपने द्रव्य से जिन शासन की प्रभावना हो वह बड़ी बात है द्रव्य सबके पास है ,किंतु देने की ताकत श्रद्धा ,क्षमता, और साहस हर किसी के पास नहीं होता ।आपके पुण्य की महिमा है कि आप अभिषेक,शांतिधारा, निर्वाण लाडू चढ़ा पा रहे है हमारे सारे कार्य भगवान आदिनाथ से आचार्य पुष्पदंत जैसे आचार्यों , संतों के आशीर्वाद से सब कार्य संपादित होता है इस क्षेत्र से साढ़े पांच करोड़ मुनिराज मोक्ष गए है उनकी वर्गणा पूरे निमाड़ को मिल रही है,हमारे तीव्र पुण्य है कि हमें इस अवसर पर आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज का आशीर्वाद और सानिध्य मिल रहा है ,आचार्य श्री विप्रणत सागर जी ने कहा कि मेला मेल कराता है, मेले में तो मुनियों के आचार्यों के तीर्थों के भगवान के दर्शन कराता है काव्यात्मक अंदाज में अपनी बात कही,आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज ने कहा कि आप की साधु या संत को नमस्कार कर रहे हो तो आप नग्नता को नमस्कार कर रहे हो ,त्याग को नमस्कार कर रहे हो ,यदि नग्नता नहीं रहेगी तो निर्वाण भी नहीं होगा ,आपको अपनी इच्छाओं को मन का गुलाम बनाना पड़ेगा वासनाओं को खत्म करना होगा,मन को गुलाम बनाओ मन के गुलाम मत बनो, हमारी नजरे अपने मन के पास नहीं होगी,मन हृदय के पास नहीं होगा,हृदय आत्मा के पास नहीं होगा तब तक हम पुण्य नहीं कर सकते।
इस अवसर पर सम्पूर्ण निमाड़ ,मालवा और अन्य प्रदेशों से भी श्रावक श्राविकाओं ने शामिल हो कर पुण्यार्जन किया ,साथ ही आचार्य श्री विद्या सागर जी की प्रेरणा से हथ करघे का भी लोकार्पण किया गया।
उपरोक्त जानकारी मीडिया प्रभारी मनीष जैन व ने दी प्रदान की
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


