*सारे लोगों के विचार एक हो जायें तो सृष्टि इतनी अच्छी नहीं बन पायेंगी –मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज*राधौगढ़ पंच कल्याणक महा महोत्सव के लिए मुनि संघ का चल रहा है विहार अशोकनगर –प्रकृति के अपने नियम कायदे है समय पर वर्षा सर्दी गर्मी का होना कभी कभी प्रकृति अपना रुप बदलती रहती है हमें प्रकृति को छेड़ना नहीं है और रूकना नहीं है यदि सारे लोगों के विचार एक हो जाए तो सृष्टि इतनी अच्छी नहीं बन पाएंगी अतः मतभेद हो पर मन भेद नहीं होना चाहिए। तुलसी का पत्ता और नीम का पत्ता दोनों विरोधी है, वनस्पति होकर दोनों के विचार नहीं मिलते हैं, क्यों न हम दोनों पर शोध करें, तुलसी के पत्ते की उकाली बनाये और नीम के पत्ते का काढ़ा बनाये और प्रकृति के इन दोनों उपहारों का सही उपयोग करें उक्त आश्य केउद्गार सोहरा जिला सागर के निकट जिज्ञासा समाधान समारोह को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए।
राहतगढ़ में हो रही है भव्य आगवानी की तैयारियां
मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि संत शिरोमणि आचार्य भगवंत गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ क्षुल्लक श्री गम्भीर सागर जी महाराज क्षुल्लक श्री वरिष्ठ सागर जी महाराज क्षुल्लक श्री विदेह सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में अशोक नगर जिले की सीमा पर स्थित राधौगढ़ में श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महोत्सव के भव्य आयोजन में सान्निध्य प्रादन करने पधार रहे हैं इस हेतु लम्हेटा जबलपुर से राधौगढ़ अशोक नगर की ओर मंगल विहार चल रहा है यहां अशोक नगर जैन युवा वर्ग गांव मन्दिर वाल मंडल श्री आदिनाथ विद्या भक्तांमर मंडल के युवा पैदल विहार में सहभागिता दे रहे हैं। कल रविवार को मुनि ससंघ का राहतगढ़ में प्रातः काल की बेला में भव्य मंगल प्रवेश होगा।

जिससे आपका संबंध है आप उसके मंगल की भावना भा सकते हैं
उन्होंने कहा कि भावनाओं का प्रभाव तो पड़ता ही है भावना भाने में आपकी एकाग्रता लगल है इससे प्रभाव दिखाई देता है जिससे आपका संबंध है आप उसके मंगल की भावना भा सकते हैं। यदि सच्चा संबंध है तो कोमा में पड़े हुए व्यक्ति पर भी आपकी भावना का प्रभाव पड़ सकता है पंचकल्याणक में एक भवतारी के अंतर्गत आते है सौधर्मेन्द्र, लौकांतिक देव, शचि इंद्राणी, कुबेर और जितने दक्षिणेन्द्र होते है सनत कुमार आदि ये नियामक रूप से एक भवतारी है।

किसी कार्य को करने के पहले सोचें इससे किस कर्म का बंध होगा*उन्होंने कहा कि हम कोई कार्य करने के पहले सोचे कि इस कार्य को करने में कौन से कर्म का बंध है। यह कार्य करने से ऐसा कर्म तो नहीं बंध जाएगा जो कर्म हमारे ऊपर भारी पड़ जाए, हमारे गुरु, णमोकार मंत्र, भक्तामर से भी भारी पड़ जाए जैसे तुम किसी एक धर्म को मानो लेकिन दूसरे संप्रदाय के मानने वाले का विनाश मत करो अन्यथा ये कर्म तुम्हारे ऊपर भारी पड़ेगा कषाय इतनी हो कि कल राजीनामा हो तो एक दूसरे को क्षमा तो कर सकों।


जिस घर में गाय रहतीं हैं उस घर में कभी कैंसर नहीं हो सकता-मुनि श्री
उन्होंने कहा कि जिस घर में गाय रहती है उस घर में कभी कैंसर नहीं हो सकता। यदि किसी ने एक बार भी गाय का दूध पिया है तो उसको जीवित रखो और जीवित रखने का एक ही तरीका है कि सारे लोग मिलकर एक बहुत अच्छा बाड़ा सरकार से लो और गौशाला खोलकर उसमें सुरक्षित करों और उसमें अपनी भागीदारी दो। हर व्यक्ति को एक गाय गोद लेनी हैं, अकेले घास से ही नहीं, आवास से भी, एक गाय जहाँ बैठेगी वो जमीन तुम्हारी हो, जहाँ रहेगी वो छप्पड़ भी तुम्हारा हो, जिंदगी भर जो खाएगी वो भी तुम्हारा हो, ये कर लिया तो सारे बूचड़खाने अपने आप बंद हो जायेंगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
