*शिविर में अध्यात्म और धर्म का ज्ञान सीख रहे युवा,हो रहे कई ज्ञानवर्धक कार्यक्रम*
विदिशा।
प्रवक्ता शोभित जैन ने बताया कि धार्मिक नगरी विदिशा में 10 मई से 16 मई तक श्री शीतलनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर किले अंदर मे चल रहे जिन देशना प्रथम आध्यात्मिक जैनत्व बाल युवा शिक्षण शिविर के चौथे दिन मुम्बई से पधारे निखिल भैया द्वारा छहढाला ग्रंथ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जीव अनादिकाल संसार में से तरह तरह के दुख भोग रहा है आज हमें निखिल भैय्याजी ने तिर्यंच व नरक गति में जीव ने किस तरह के दुख भोगे है वह बताया
तिर्यंच गति में यह जीव निर्बल पशु हुआ जो बलवान पशुओं के द्वारा खाया गया छेदा गया भेदा गया भुख प्यास आदि के अनंत दुख सहन किये जिसे करोड़ो जीभों से भी नही कहा जा सकता।


ध्रुव शास्त्री द्वारा बताया इस पृथ्वी के नीचे सात नरक है उस भूमी के स्पर्श मात्र से नारकियो को इतनी वेदना होती है कि हजारो बिच्छु डंक मारे तब भी उतनी वेदना न हो ठंडी गर्मी भुख प्यास के अनंत दुखो को वहां सहना पड़ता है ।असुर कुमार देव आकर नारकीयों को एक दूसरे से पूर्व का बैर बताकर लड़ाई करवाते है इस तरह केअनंत दुख इस जीव ने नरक में सहन किये है।


इसी प्रकार तीसरी कक्षा में अशेष शास्त्री द्वारा कषाय क्या होती है बताया गया। जिनके कारण प्राणी दुःख पाता है उसे कषाय कहते हैं। संसार में जीव (हम सब) कषाय के कारण ही दुःखी हैं। कषाय 4 प्रकार की होती हैं – क्रोध, मान, माया(छल कपट), लोभ(लालच)। इन कषाय भावों से ही प्राणी कर्मों से बंधता है और संसार में अनंत कष्ट को पाता है। अगर इस घोर कष्ट भरे संसार से छूटना है तो इन कषाय भावों को पूरी तरह छोड़ना होगा। एक मात्र तत्त्वाभ्यास अर्थात वस्तु स्वरूप की सही जानकारी से ही ये कषाय छूटेंगी। जिनवाणी (शास्त्रों) के स्वाध्याय से ही वस्तु स्वरूप की सही जानकारी हो सकती है।

प्रवक्ता शोभित जैन ने बताया कि सायंकालीन कार्यक्रम में संगीतमय भक्ति ,कक्षाएं एवं ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रम कराये गये ।जिसमे बच्चों को सुबह और शाम पुरस्कार पुरस्कार वितरण समिति चिरंतन बड़कुल,अक्षय सिंघई ,गगन जैन द्वारा किये गए।आध्यात्मिक एव ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रमों में बच्चों के बीच खासा उत्साह और उमंग देखी जा रही है।
प्रवक्ता शोभित जैनअखिल भारतीय युवा फेडरेशन विदिशा शाखा से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
