अच्छी बुरी संतान मिलना भी पिछले जन्मों के कर्मों का खेल है प्रसन्न सागर महाराज
उत्तराखंड पद विहार
अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा हर माता पिता को संतान का सुख मिलता है..परन्तु ऐसे कितने माता पिता है जिन्हें संतान से सुख मिलता है–??
महाराज श्री ने कहा अच्छी बुरी संतान मिलना भी पिछ्ले कर्मों का खेल है, कर्मों का फल है। बेटा आज्ञाकारी हो तो ज्यादा गर्व ना करना, ना ज्यादा खुश होना, अपितु यह सोचना कि बेटा कभी भी पड़ोसी बन सकता है। कभी भी मेरे खिलाफ खड़ा हो सकता है। इस चिंतन से संतान के प्रति तीव्र आसक्ति से बच सकोगे और बेटा यदि आज्ञा नहीं मानता, स्वच्छंद और उदंड हो तो यह मत कहना कि कैसा कमबख्त है, मेरी एक बात नहीं सुनता। हे भगवान! इससे अच्छा ना होता तो ठीक था, अपितु यह सोचना कि मूर्च्छा और आसक्ति कम करने के लिए ही शायद ऐसा पुत्र मिला है। जो पग पग पर मुझे संसार की असारता और दु:ख पीड़ा का आभास कराता है। यह चिंतन संसार शरीर भोगों में वैराग्य में कारण बनेगा।




महाराज श्री ने कहा पुत्र वही है, जो अपने माता पिता के प्राण और प्रतिष्ठा को कायम रखे,, उनकी कीर्ति को बढ़ा दे। राम और लक्ष्मण की तरह, भरत और बाहुबली की तरह, अपने माँ बाप के नाम को दुनिया में रोशन करे। ऐसे पुत्र के पिता होने का सौभाग्य दोनों को ही मिलता है…!!!


नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
