मुनि श्री सुधासागर महाराज जेल के कैदियो को संबोधित करने तीन किलोमीटर पैदल गए मैं अपराधियों के बीच में नहीं आया मैं तो अपने भाइयों के बीच आया हूं मुनिश्री
अशोकनगर
भगवान जानते हैं कि वह हर जगह नहीं। पहुंच सकते इसलिए भगवान भक्तों को भेज देता है। श्री राम दुनिया में इतने नहीं जानें गए। सबसे पहले लंका में हनुमानजी पहुंचे और उन्होंने लंका वासियों को दिखा दिया ये तो सभी भक्त हैं जेल तो उन दुश्मनों को बनाई गई है जो देश विरोधी हैं। ये जेल हमारी मातृभूमि को अपना नहीं मानते जिन्हें वंदे मातरम् कहने में शर्म आती है उन्हें। बनाई गई है।
मैं अपराधी के बीच में नहीं आया मैंअपने भाइयों के बीच आया हूं।
इतना अंतर क्यों हम सब की मां भारत माता है। उक्त आशय के उदगार जिला जेल में बंदियों को संबोधित करते हुए राष्ट्र
संत मुनि पुंगव सुधासागर जी महाराज। ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जीवन हमें खुशियों के इजहार के लिए मिला है इस इज्जत। हकदार आप सब है। हनुमान जी कैसे हमे इज्जत मिलती है वह रास्ता हमें बता रहे हैं। दुनिया भक्तों के बीच में भगवान को देखना चाहते हैं। भगवान के भक्त बनने का मतलब ये नहीं है। कि तुम मेरी जय कार करो भक्ति का मतलब तुमे लोग इज्जत से देखें। तुम्हारे। लिए एक विचार आए कि जब भगवान। का भक्त ऐसा है तो भगवान कैसा होगा।
अपने खून पसीने की कमाई। नशा करेंगे शराब पीते हो उन्होंने कहा कि हमारा देश गरीब। क्यों हैं। हम अमेरिका की बराबरी ना करें अमेरिका का पैसा गलत तरीके से आता है उनके सन साधन ऐसे हैं कि आप सोच नहीं सकते। लेकिन यदि आप अपने खून पसीने की कमाई से। नशा करेंगे शराब पीते हो तो आपके जीवन में कभी खुशहाली नहीं ला सकते। जेल तुम्हारे लिए दुख देने के। लिए नहीं मिला। जेल तुम्हारे लिए। सुधरने का मौका देता है। इस धरती पर इज्जत से जीने के लिए ईश्वर ने भेजा। था। तुम क्या कर बैठे। कभी इगो पाइंट मत बनना, नशा मत करना। जिस भारत मां की गोदी में जन्म लिया उसके। साथ हम ऐसा कोई अपराध ना करें
जिससे आप को जेल में जाना पड़े हम अपने जीवन को सुव्यवस्थित बनाएं।
संस्कृति कैसी महान है जहां। नारायण श्रीकृष्ण भी शान्ति
के लिए दूत बन जाते हैं उन्होंने कहा कि श्री राम चन्द्र जी
एक भाई का गला उतार लेते हैं एक भाई को गले लगा लेते हैं हमारी। संस्कृति कैसी महान है। जेल इसलिए बनाई गई कि
विदेशी आकर हमारे देश में उत्पात ना मचा दें हम क्या कर बैठें एक छोटे से जमीन के टुकड़े के लिए अपने भाई से लड़ पड़े। जाओ में तुम्हारे लिए। आशीर्वाद देता हूं। आप भाई के
चाहते तो कोर्ट केस कर देते वो चाहते कारण भिखारी नहीं बनोगे।
श्रीकृष्ण जी दुर्योधन को समझाने के। लिए दूत बन गए। आपके जेल अधीक्षक दीक्षित जी निवेदन करने आयें तो मन में विचार आया कि के पास आते कानून से राज्य से श्रीकृष्ण जी जैसी महा शक्ति दूत उन्होंने अपना अधिकार क्यों नहीं
तरफ से वे अधिकारी थे। फिर भी दूत बनने को तैयार हो गए बस देखा कि आदेश कौन दे निकृष्ट माना जाता है फिर भी वे विश्व। शांति के लिए दूत बन गए
मां ने कहा है बस श्रीराम वन के लिए चल दिए सोचा कि मेरा क्या बिगड़ता है जिनबंदियों को सजा हो जाती है उनके परिवार की क्या दशा होती है। अच्छे के सब साथी होते हैं बुरे का कोई नहीं। आप अपनी सजा को ईमानदारी में बदल दो तुम्हारे लिए जेल के दरवाजे खुल जाएं सजा प्रायश्चित बन जाए। आप आदर्श कैदी बन जाए जेल अधीक्षक हम साधु संतों को जब मौका मिले इसलिए लेकरआते हैं कि जीवन सुधर जाए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





