जैन धर्मावलंबी साध्वी के तीन माताजी सड़क दुघर्टना में धायल जैन समाज ने भारत सरकार से जैन साधु एवं साध्वियों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की

धर्म

जैन धर्मावलंबी साध्वी के तीन माताजी सड़क दुघर्टना में धायल
जैन समाज ने भारत सरकार से जैन साधु एवं साध्वियों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की

निवाई –
जैन आर्यिका 105 गुरु मति माताजी एवं आर्यिका 105दृढ़ मति माताजी की शिष्या आर्यिका चिंतन मति माताजी एवं ब्रह्मचारी संजय भैया कटंगी एवं एक श्राविका को पद विहार के दौरान एक कार की टक्कर से जैन धर्मावलंबी साध्वी के तीन माताजी सड़क दुघर्टना में धायल हो जाने से निवाई जैन समाज ने दुःख प्रकट किया।

 

 

जैन धर्म प्रचारक विमल जौंला ने बताया कि युग श्रेष्ठ समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर महाराज के संधस्थ आर्यिका प्रमुख की शिष्याओ का रांची हजारीबाग सड़क पर जैन धर्मावलंबी साध्वी के तीन माताजी एक कार की टक्कर से सड़क दुघर्टना में धायल हो गए।

इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष नेमीचंद गंगवाल मंत्री महावीर प्रसाद पराणा दिगम्बर जैन अग्रवाल समाज अध्यक्ष विष्णु बोहरा कोषाध्यक्ष त्रिलोक सिरस सरावगी समाज अध्यक्ष शिखरचंद काला बड़ा जैन मंदिर के मंत्री मोहित चंवरिया उधोगपति एवं युवा समाजसेवी दिलीप भाणजा, शंभु कठमाणा, महावीर प्रसाद छाबड़ा, कृषि मंडी व्यापार मण्डल अध्यक्ष ओमप्रकाश चंवरिया, नगरपालिका उपाध्यक्ष जितेन्द्र जैन, अग्रवाल समाज चोरासी संरक्षक हुकमचंद जैन, सुशील नीरा जैन आरामशीन, अशोक कटारिया, सुनील भाणजा, लालचंद कठमाणा, राजेन्द्र बगड़ी, नेमीचंद सिरस, बंटी झांझरी, नितिन छाबड़ा, जैन धर्म प्रचारक विमल पाटनी, हितेश छाबड़ा, सुशील गिन्दोडी़, पवन बोहरा, सहित जैन समाज के श्रद्धालुओं ने धायलो के प्रति दुःख प्रकट करके भारत सरकार से सम्पूर्ण भारतवर्ष में दिगम्बर जैन साधु एवं साध्वियों के लिए सुरक्षा प्रदान करने की मांग की।

 

उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी इस तरह के कई बार हादसे हो चुके हैं।

जौंला ने बताया कि आर्यिका संध रांची से सम्मेद शिखरजी की ओर पद विहार कर रही थी उसी दौरान पीछे से एक कार ने टक्कर मारकर घायल किया।जैन साधु संत क्षमा की मूर्ति जिसका प्रत्येक उदाहरण देखने को मिला

जिस गाड़ी के द्वारा माताजी को आदि को चोट लगी इस गाड़ी के चालक एवं चालक परिजन आर्यिका माताजी के चरणों में पहुंचे और बेहद नम आंखों से गुरु मां संघ से अपनी गलती की क्षमा मांगी और जीवन भर साधु संतों की सेवा का संकल्प लिया।

जैन संत तो साक्षात क्षमा की मूर्ति होते हैं वे तो अपने ऊपर आए संकट को उपसर्ग मानकर परिषह सहन करते हैं। ऐसा ही उदाहरण देखने को मिला गुरु मां ने अभयदान देते हुए क्षमा के सिद्धांत को आत्मसात करते हुए क्षमादान दिया

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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