संतों की सेवा संगति से ही पुण्य अर्जन होता है। उपाध्याय विशेष सागर जी
सनावद
संतों की जन्म नगरी में आपका जन्म लेना सौभाग्य की बात है। संतों की जन्म नगरी होने से तथा सिद्धक्षेत्रों के मध्य में होने से दिगम्बर संतों का समागम आपको निरन्तर प्राप्त हो रहा है। शनिवार को पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी का भव्य स्वागत आपने किया और उसके बाद आप सभी को प्रतिदिन नए नए संघों के आगमन का लाभ मिल रहा है। साधुओं की सेवा से पुण्य बंध होता है। उक्त विचार उपाध्याय विशेष सागर जी ने व्यक्त किए।
अजय पंचोलिया ने बताया कि सर्व प्रथम मंगलाचरण से धर्म सभा का शुभारंभ हुआ। उपाध्याय ने अपने गुरु नाम गुरु वात्सल्य दिवाकर आचार्य विमल सागर जी का स्मरण करते हुए कहा कि वे बहुत ही निमित्त ज्ञानी थे।
आने वाली विपत्ति या खुश खबर को पहले ही जान लेते थे।उनके दर्शन करने मात्र से ही छोटी छोटी बीमारियां अपने आप दूर हो जाती थीं। उनके आशीर्वाद में चमत्कार था। उन्हीं का पावन आशीर्वाद था कि गणचार्य विराग सागर गुरुदेव ने यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई।अनेक भव्य जीवो को दीक्षा प्रदान कर मुक्ति के मार्ग पर लगाया। अपने संघ के सभी साधुओं को उनके ज्ञान के अनुसार उप संघों में विभाजित कर दिया।

आज गुरु के आशीर्वाद से पूरे देश में विराग सागर गुरुदेव के शिष्य धर्म प्रभावना कर रहे हैं। गुरुदेव की उत्कृष्ट समाधि का भी विस्तार पूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि गुरुदेव को 2 दिन पहले ही आभास हो गया था कि अब मेरा समय निकट ही पूर्ण होने वाला है। आपने अनेक संतों और भक्तों की सन्निधि में अपनी बात रखते हुए अपना गणचार्य पद अपने प्रिय शिष्य आचार्य विशुद्ध सागर जी को प्रदान करने का संदेश दिया। जिसको सभी संतों ने शिरोधार्य करते हुए स्वीकार किया।



धर्मसभा में नरेंद्र भारती, संतोष बाकलीवाल,कमल जैन के के, सन्मति जैन,बसंत पंचोलिया,रिंकेश जैन,अशोक पंचोलिया, पवन धनोते,श्री मति संगीता पाटोदी, रेखा जैन,उर्मिला जैन, गरिमा जैन, मधु भूँच,रीना प्रीति जैन सहित श्रद्धालु उपस्थित थे।संचालन प्रशांत जैन ने किया अंत में जिनवाणी स्तुति हुई। शाम 5 बजे गुरुदेव का विहार सिद्धवरकूट की ओर हुआ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
