मनुष्य के अंदर जैसे भाव होते हैं वैसी उसकी सोच बनती है जैसी उसकी सोच बनती है,वैसी उसकी प्रवृत्ति होती जाती है प्रमाण सागर महाराज

धर्म

मनुष्य के अंदर जैसे भाव होते हैं वैसी उसकी सोच बनती है जैसी उसकी सोच बनती है,वैसी उसकी प्रवृत्ति होती जाती है प्रमाण सागर महाराज
भोपाल
“मनुष्य के अंदर जैसे भाव होते है वैसी उसकी सोच बनती है,जैसी उसकी सोच बनती है वैसी उसकी प्रवृत्ति हो जाती है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने विद्यासागर इंस्टीट्यूट आंफ मेनेजमेंट के विशाल प्रांगण में कार्यशाला को संबोधित करते हुये व्यक्त किये।

 

 

मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों ने प्रवचन तो बहुत सुने है अब प्रवचन के साथ सकारात्मक प्रयोग भी करना है अतः प्रतिदिन प्रवचन के उपरांत पांच मिनट का भावनायोग भी कराया जायेगा जिससे सभी सहज शांत और प्रसन्नता का जीवन अपना सकें।
उन्होंने कहा कि दुनिया में वह लोग भी है जिन्हें हम महापुरुष के रुप में पूजते है,तथा दुनिया में वह लोग भी है जिन्हें हम दुष्ट या दुरात्मा के रूप में जानते है,  

मुनि श्री ने कहा कि जन्म से कोई महापुरुष तथा दुष्टदुरात्मा नहीं होता यह तो उसकी सोच और संस्कार होते है जो कि भाव के रूप में प्रकट होते है मुनि श्री ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य अपनी भावना के प्रवाह में जीता है कुछ भावनायें क्षणिक और आवेश भरी होती है तो कुछ भावनायें स्थाई हो जाती है,क्षणिक भावनायें आवेश के रुप में प्रकट होती है तथा कुछ भावनायें संवेग के रुप में स्थाई हो जाती है।

 

मुनि श्री ने कहा अच्छी भावनायें हमारे अंदर चरित्र का निर्माण करती है वही दुष्ट भावनायें हमारे पतन का कारण बनती है।अच्छी बुरी भावनायें अच्छे बुरे व्यक्तित्व को जन्म देती है मुनि श्री ने कहा जीवन में नकारात्मक विचार आक्रोश को जन्म देता है तथा सकारात्मक विचार व्यक्ती को ऊंचा उठाता है। इसलिये संत कहते है कि सकारात्मकता की ओर बढ़ने का हमारा लक्ष्य होना चाहिये जिससे व्यक्ति सही दिशा में अपने कदम आगे बढ़ा सके।

       

मुनि श्री ने कहा कि कुछ लोग अपने आपको सही तथा दूसरों को गलत समझते है उन्होंने कहा कि अपने आपको टटोलो और परखो? मेरा जीवन किधर है? अपने आपको पहचानो फिर निर्णय करो कि मेरा जीवन किधर है? उन्होंने कहा कि उपासना और साधना यह दो मार्ग है उपासना में किसी के पीछे चलना होता है लेकिन “साधना” को देखकर लोग अपनी धारणा बनाते है,जिससे उसके जीवन का रुपांतरण होता है।

इस अवसर पर मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज एवं मुनिश्री संधान सागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक एवं ब्रहम्चारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन ब्र. अशोक भैया ने किया। मुनि संघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया वर्तमान में मुनिसंघ आचार्य श्री विद्यासागर इंस्टीट्यूट आंफ टैक्नोलॉजी में विराजमान है। यहा पर “श्रीविद्याप्रमाण गुरुकुलम” की स्थापना होकर बच्चों का चयन किया जा चुका है,तथा नामांकन प्रक्रिया के तहत विधिवत शुरुआत हो रही है। श्री जैन ने बतायाअभी 15 दिन तक मुनिसंघ का यंही पर प्रवास रहेगा प्रतिदिन 8:35 से एक एक विषय पर प्रवचन होंगे तत्पश्चात 5 मिनट भावनायोग होगा जिससे जीवन का रुपांतरण किया जा सके। प्रतिदिन सांयकालीन शंकासमाधान 6:20 से7-15 तक यंही से संपन्न होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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