पूज्य मुनिश्री नीरज सागर एवम निर्मद सागर महाराज के सानिध्य में भक्ति भाव के साथ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का पूजन 8/वर्ष तक के बच्चों का संस्कार देना माता पिता का दायित्व है नीरज सागर महाराज

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पूज्य मुनिश्री नीरज सागर एवम निर्मद सागर महाराज के सानिध्य में भक्ति भाव के साथ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का पूजन 8/वर्ष तक के बच्चों का संस्कार देना माता पिता का दायित्व है नीरज सागर महाराज
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108विद्यासागर महाराज के परम शिष्य एवं परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज जी के आज्ञानुवर्ती परम पूज्य मुनि श्री 108 नीरज सागर महाराज एवं पूजन मुनि श्री 108निर्मद सागर महाराज सानिध्य में भक्ति भाव के साथ श्री जी का अभिषेक शांति धारा की गई। शांति धारा का सौभाग्य राजमल पदम कुमार परिवार एवं गणेश कुमार मोहित कुमार जैन परिवार को प्राप्त हुआ इसके बाद भक्ति उल्लास के साथ आचार्य श्री 108विद्यासागर महाराज का पूजन किया गया रविवार होने से आज बच्चों में काफी उत्साह था भक्ति करते हुए आचार्य श्री का पूजन किया। पूजन में संगीत की स्वर लहरियां झालावाड से आई बिटिया स्वरा जैन ने बिखेरी समस्त आयोजन का संचालन प्रशांत जैन आचार्य एवम आकाश जैन आचार्य ने किया इन मांगलिक पलो में आदिनाथ जैन श्वेतांबर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने महाराज श्री की चरणों में श्रीफल समर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। एवं झालावाड़ से पधारे नेरू जैन एवम स्वरा जैन ने भी मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इसी बेला में मौजूद बच्चों को महाराज श्री के कर कमलों में शास्त्र भेट करने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ।

 

 

सर्वप्रथम मंगल प्रवचन देते हुए मुनिश्री 108निर्मद सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में संस्कारों की ओर उल्लेख करते हुए कहा की हॉलीडे का मतलब पवित्र दिन होता है। महाराज श्री ने अपने मंगल प्रवचन में बच्चों की और ध्यान आकर्षित करते हुए बचपन की बात याद करके कहा कि बड़ा होकर क्या बनना है, आज एहसास होता है कि मुझे बच्चा बनना है हमारा हृदय बच्चे जैसा होना चाहिए हम जैसे ही बड़े हो जाते हैं मायाचारी बढ़ जाती है हमें बच्चों जैसे सरल बन मृदु भाव लाना चाहिए। बच्चों को हमेशा अच्छी शिक्षा दी जाए और हम अच्छे बने उच्च शिक्षा केवल हिंदी माध्यम से ही प्रदान होती है।

 

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य अर्थ कमाना नहीं होना चाहिए। आज दुनिया पैसे के पीछे भाग रही है, संस्कारों को आना शिक्षा है जितना ज्यादा शिक्षा हुई है उतने बच्चे बिगड़े हुए हैं। संस्कार ऐसे हो कि मेरा बच्चा कीचड़ में भी मलिन न हों जिस प्रकार कीचड़ में कमल खिलता है उसी प्रकार। उन्होंने कहा कि बच्चे बाहर जाते हैं वह हमारे नहीं रहते तो ऐसी शिक्षा किस काम की की बच्चे हमारे नहीं रहे। बाहर जाकर बच्चे सप्त व्यसन में लिप्त हो रहे हैं घर में रहे तो गुरु के पास जाएंगे और संस्कारवान बनेंगे पढ़ाई का उद्देश्य संस्कारित होना चाहिए। भले ही कम पढ़ लेना लेकिन घर में रहकर पढ़ लेना। महाराज श्री ने आचार्य श्री का जिक्र करते हुए कहा कि आचार्य श्री कहते थे कि हम किसी भी भाषा का ज्ञान करें अध्ययन करें लेकिन हमारी स्पेशल भाषा

 

 

हिंदी होना चाहिए उन्होंने आचार्य श्री का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें 9 भाषाओं का ज्ञान था उन्होंने कहा कि हम किसी भी भाषा में पढ़े लेकिन हमें सपने जब भी आएंगे हिंदी में आएंगे इंग्लिश शब्द में हर शब्द साइलेंट हो जाता है।
इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री नीरज सागर महाराज ने भी संस्कारों के प्रभाव के विषय में बताया उन्होंने कहा कि जीवन में मनुष्य बहुत चंचल होता है मानव के मन की चंचलता को बंदर की उपमा दी जाती है। हमने सब कुछ सुन लिया लेकिन बच्चों को संस्कार नहीं दिया तो सब व्यर्थ हो जाता है व्यक्ति का मन आसक्ति में रहता है हमारे जीवन का सुर भटका नहीं और हमारे बच्चों से हमारी नजर अलग हुई और बच्चे भटक जाते है। उन्होंने संस्कार के विषय में कहा कि बच्चे यदि संस्कार से विमुख है तो उसका दायित्व माता-पिता पर होता है 8 वर्ष तक के बच्चों का दायित्व माता-पिता पर होता है उन्होंने कहा कि श्रमण हमारी कोख से आते हैं इसका दायित्व अभिभावक पर होता है। बच्चों को आध्यात्मिक आचरण की शिक्षा देनी चाहिए। पहले बच्चे बच्चियों को संकल्प दिलाया जाता था।यदि हमने भी दिलाया नहीं ऐसा इसलिए कि हम स्वयं भी स्वार्थ की दिशा की ओर चल रहे हैं और हमने हम स्वयं भी सही दिशा में नहीं तो हम बच्चों को क्या शिक्षा देंगे। हमें बच्चों को भी जागृत करना होगा एवं सही दिशा में संस्कारित करना होगा । हमने बच्चों को आध्यात्मिक आचरण की शिक्षा नहीं दी।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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