प्रसिद्ध भामाशाह अशोक पाटनी ने दिया प्रथम आहार महामुनि श्री चन्द्रप्रभु के दीक्षा तप कल्याणक पर आहार चर्या एवं समवशरण से दिव्य देशना हुई भारत भूमि का पुण्य है कि यहां तीर्थंकरों ने जन्म लेकर धर्म का प्रवर्तन कियाआचार्य श्री वर्धमान सागर जी
पीपल्दा सवाई माधोपुर 1 दिसंबर (राजेश पंचोलिया इंदौर)
आचार्यश्री वर्धमान सागर ससंघ सान्निध्य पंच कल्याणक कार्यक्रम में हेलीकाप्टर से प्रसिद्ध भामाशाह अशोक पाटनी आर के मार्बल ग्रुप किशनगढ़ एवं श्री राजेन्द्र कटारिया अहमदाबाद प्रभु ,गुरु दर्शन को परिवार सहित पधारे।श्रीमद जिनेंद्र पंच कल्याणक समिति द्वारा सकल दिगम्बर जैन समाज के सहयोग से आयोजित पंचकल्याणक महा महोत्सव के चौथे दिन केवलज्ञान कल्याणक पर श्री चंद्र प्रभु महामुनिराज को प्रथम आहार देने का सौभाग्य प्रसिद्ध भामाशाह श्री अशोक पाटनी,राजेंद्र कटारिया अहमदाबाद एवं परिवार को प्राप्त हुआ। अनेक पुण्य शाली समाज जनों का आहार देने का सौभाग्य मिला ।इस अवसर पर देवकृत रत्नवर्षा, पुष्पवर्षा, गंधोदक वृष्टि,, शीतल मंद सुगंधित वायु प्रवाह, दुंदुभी बाजे पंचाश्चर्य होते हैं।इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में वात्सल्य वारिधि राष्ट्र गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा कि श्री चंद्रप्रभु भगवान को केवलज्ञान होने पर धर्मतीर्थ का प्रवर्तन स्थान स्थान पर समवशरण में धर्म देशना दी। भारत की अनेक नगरों में जिनालयों का निर्माण कर भगवान की प्रतिमा विराजित की जाती है प्रतिमा और भगवान में यह अंतर है कि आचार्य साधु परमेष्ठि प्रतिष्ठाचार्य के माध्यम से प्रतिमा में भगवान के गुणों का आरोपण सूरी मंत्रोच्चार से देते हैं तब वह प्रतिमा भगवान बनकर पूजनीय हो जाती है। सोधर्म इंद्र और अन्य इंद्र परिवार ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में भाग लिया है इंदौर जैसे महानगर में रहने वाले समर कंठाली ने छोटे से ग्राम के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा में सौधर्मइन्द्र बने हैं ,उनके साथ अनेक राज्यों, नगरों के भी इंद्र बने हैं यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने महामुनि श्री चंद्र प्रभु के तप कल्याणक के पावन अवसर पर प्रगट की राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे उपदेश में बताया कि आहार दान की पात्रता श्रेष्ठ पुण्यशाली मनुष्यों को होती है देवताओं को आहार देने की पात्रता नहीं होती है। सौधर्म इंद्र रत्नों जड़ित भव्य समवशरण की रचना करेंगे जिसमें महामुनि श्री चंद्रप्रभु दिव्य देशना से धर्म तीर्थ का प्रवर्तन करेंगे।मनुष्य जीवन में आपने कितना धर्म धारण कर पालन किया है इसका स्वयं मूल्यांकन कीजिए।आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने प्रवचन में पाटनी और कटारिया परिवार की देव शास्त्र ओर गुरुओं के प्रति चारों दान की प्रशंसा की।
तप कल्याणक पर आगामी 5 वर्षों में जैनेश्वरी दीक्षा का संकल्प लिया
जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड़ सकता हैं संसार में रह कर प्राणी संसार को तज सकता हैं इन पंक्तियों को चरितार्थ किया सनावद मध्यप्रदेश के गुरु भक्त 56 वर्षीय अजय पंचोलिया ने उन्होंने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से वर्ष 2030 श्रवण बेलगोला में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को श्रीफल भेंट कर दीक्षा लेने का संकल्प लिया। अजय ,गृहस्थ अवस्था के पिता मुनि चारित्र सागर जी के पुत्र,आर्यिका श्री महायश मति जी के चाचा और आर्यिका श्री निर्मोह मति जी के भाई है।
समवशरण में आचार्य गणधर बने
महामुनिराज श्री चंद्र प्रभु के दिव्य समवशरण में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने गणधर रूप में भगवान की दिव्य देशना प्रसारित कर सौधर्म , मुख्य श्रोता और श्रावक श्राविकाओं की अनेक जिज्ञासा का आगम सम्मत समाधान प्रवचन माध्यम से किया । महामुनि को मनपर्यय। ज्ञान दीक्षा लेते होता हैं केवल ज्ञान होने पर 10 अतिशय के धारी होते हैं।बजरंग लाल एवं मनोज जैन सोगानी अनुसार श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के ज्ञान कल्याणक के चौथे दिन विमान शुद्धि कलश यात्रा निकाली गई। प्रतिष्ठाचार्य मनोज कुमार के निर्देशन में महायज्ञनायक दीपक प्रधान सहित सभी इंद्र द्वारा मंदिर वेदी वास्तु व हवन का आयोजन किया गया। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के मौजूदगी में केवलज्ञान संस्कार क्रिया, अधिवासना, मुखोद्घाटन, नयनोन्मिलन, सूरीमंत्र, गुणारोपण, केवल ज्ञान पूजा, हवन, पद्दोद्घाटन, समवसरण दर्शन व 46 दीप से आरती, दिव्य ध्वनि का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों जैन समाज के लोगों ने भगवान श्री चंद्रप्रभु एवं आचार्य श्री वर्धमानसागर महाराज के जयकारों से पांडाल को गूंजा दिया। आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज के सान्निध्य में दीप प्रज्वलन व चित्र अनावरण तथा आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन एवम् जिनवाणी भेट प्रसिद्ध भामाशाह अशोक पाटनी किशनगढ़ एवं राजेंद्र कटारिया अहमदाबाद ने परिवार सहित द्वारा किया। सांयकालीन आरती करने के सौभाग्यशाली परिवार के लोग वर्धमान सभागार पहुंचे जहां पर श्रीजी की महाआरती की गई। शास्त्र सभा के बाद सांस्कृतिक का आयोजन किया गया
2 दिसंबर को होगा मोक्ष कल्याणक
श्री चन्द्रप्रभु भगवान आयु केअंत में योग निरोध करते हैं विहार और धर्म उपदेश बंद हो जाता है। भगवान के मोक्ष जाने के बाद अग्निकुमार देव अंतिम संस्कार करते हैं और मोक्षकल्याणक की पूजन की जाती है इस प्रकार तीर्थंकर बालक के गर्भ में आते ही गर्भ ,जन्म, तप ,,ज्ञान,और मोक्ष कल्याणक के रूप में पांच कल्याणक मनाए जाते हैं। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312










