वर्धमान नगर में बनेगा “वर्धमानधाम” तीन मंजिला भव्य जिनालय बनाने हेतु किया गया शिलान्यास*
(भोपाल)
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज,मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज,मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ सानिध्य में भोपाल शहर के वर्धमान नगर में वर्धमानधाम” तीन मंजिला भव्य जिनालय बनाने शिलान्यास संपन्न हुआ।
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया वर्धमान नगर में दस हजार स्कायर फिट में यह तीन मंजिला भव्य जिनालय राजधानी भोपाल का आकर्षक जिनालय होगा। साथ ही साथ अतिथि निवास एवं संत वसतिका का भी शिलान्यास किया गया बाल ब्र. अशोक भैया लिधोरा के निर्देशन में सुमति भैया पारस भैया भोपाल के सहयोग से पूर्ण हुआ।इसी के साथ आचार्य श्री के आशीर्वाद से संचालित दयोदय महासंघ का राष्ट्रीय अधिवेशन अध्यक्ष प्रेमचंद प्रेमी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि एवं पदाधिकारी शामिल हुये तथा मुनि श्री ने उनको दिशानिर्देशन तथा आशीर्वाद प्रदान किया।


मंदिर शिलान्यास के अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने कहा कि “घर” तो पशु पक्षी भी बना लेते है,लेकिन मनुष्य ही है जो अपने घर के साथ साथ पहले परमात्मा के घर का निर्माण करता है, जिससे उसके जीवन का पथ प्रशस्त हो सके” मुनि श्री ने कहा कि युग के आदि में जब भोग भूमी की शुरुआत हुई तथा मनुष्य ने अपने रहने के लिये अपना घर तो बनाया ही बनाया साथ में परमात्मा के लिये भी विशाल जिनालयों का निर्माण किया, भारत की यह विशेषता रही कि यहा अर्थ से अधिक परमार्थ की ओर ध्यान दिया इसका सबसे बड़ा सबूत है कि गांव गांव में भले ही स्कूल या चिकित्सा केन्द्र भले ही न हों लेकिन देवालय आपको प्रत्येक गांव में मिल जाएगे। उन्होंने कहा कि भारत की यह परंपरा रही है भले ही घर में खुद रुखी सूखी रोटी खाएगे लेकिन भगवान के आगे घी की ज्योति जलाएगे।

उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है जबलपुर की “पिसनहारी की मडिया जिसे चक्की पीस पीस कर एक मां ने मंदिर बनाया जो आज विशाल तीर्थ में रुप में ख्याति प्राप्त है, जबकि उसी समय का बना हुआ रानी रुपमति का महल बना जो आज पूर्णतया खंडहर हो चुका है। मुनि श्री ने कहा कि जिन परिवारों ने आज यहा भगवान का दिव्य मंदिर बनाने के लिये अपने दृव्य संचय को परमार्थ में लगाने का निश्चय किया है वह परिवार निश्चित ही आशीर्वाद के पात्र है,वह मंदिर का निर्माण तो करेंगे ही करेंगे साथ ही साथ अपने खुशहाल जीवन का भी निर्माण करेंगे।
उन्होंने कोलकाता के सेठ हुलासीराम अग्रवाल का उदाहरण देते हुये कहा 26 बीघा में उन्होंने बेलगछिया का भव्य जिनालय का निर्माण कराया जो आज भी उनकी गौरवगाथा को कह रहा है जबकि उनके रहने के लिये बनाये घर क्षतिग्रस्त हो चुके है। मुनि श्री ने कहा कि जो धन आप जोड़कर रखोगे वह यही छोड़कर चले जाओगे लेकिन जो धन आप परमार्थ के लिये छोड़ोगे वह आपके जीवन को शाश्वत बनायेगा।
अविनाश जैन विदिशा) से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

