नये वर्ष2026 की शुरूआत भारतीय सभ्यता के अनुसार 1 जनवरी को सूर्योदय से ही करेंः- मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज
बासा
संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री 108विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य गुणायतन, शंकासमाधान, भावनायोग प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का भोपाल चातुर्मास के उपरांत मंगल विहार श्री सम्मेदशिखर की ओर चल रहा है आगामी 31 दिसंबर को मुनिसंघ का मंगल प्रवेश कुंडलपुर में होगा एवं बड़े बाबा के दर्शन करेंगे उपरोक्त जानकारी देते हुये मुनिसंघ एवं गुणायतन के मध्यक्षेत्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री का रविवार को बासा में मंगल प्रवेश हुआ।
इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि आज बासा ग्राम में दो वर्ष पश्चात फिरसे आने का संयोग बना उन्होंने कहा कि आप लोग हाईवे पर बसे हो निश्चित भाग्यशाली हो, जहा गुरुओं का सहजरूप से आगमन होता रहता है तथा बासा का नाम हमारे साथ तो बहन सुनीता दीदी का कत्था वाला परिवार पूरी तरह से जुड़ा होंने के कारण प्रायः हर प्रसंग में बासा का नाम आ ही जाता है उन्होंने संपूर्ण बासा समाज को आशीर्वाद देते हुये कहा कि आप लोगों ने यहा मुनि श्री दुर्लभ सागर महाराज के सानिध्य में पाषाण का मंदिर बनाने का जो बीड़ा उठाया है वह साधारण कार्य नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण कार्य है उसे आप सभी लोग मिलकर पूर्ण करेंगे साथ ही उन्होंने कहा कि आपके यहा से उदार सागर महाराज का भी जन्म स्थल है तथा एक क्षेत्र का भी निर्माण किया है निश्चित ही यह सब बाहर की चीजें है लेकिन यह सब तभी घटता है जब हमारे अंदर वैसी दृष्टि प्रकट होती है।
संतो से हमें जीवन की दिशा, दृष्टि, प्रेरणा और पथ मिलता है
“धरती में बीज बोते है, तो वह अंकुरित और पल्लवित होता है,तथा पुष्पित होकर फलवान बनता है तब कही जाकर उस बीज की सार्थकता सिद्ध होती है,जैसे बीज को फलवान वृक्ष बनने के लिये धरती में समाना पड़ता है,और वही बीज यदि चट्टान पर पड़ा रह जाये तो वह हवा पानी में सड़गल कर नष्ट हो जाता है चट्टान में पड़कर भी बीज मिटता है,और मिटटी में सिमटकर भी बीज मिटता है लेकिन मिटटी में सिमटकर बीज का विराट स्वरुप वृक्ष के रुप में सामने आता है,हम सभी का जीवन बीज की तरह है हम इस बीज का क्या कर रहे है इस पर विचार करना है? क्या हम इसे धर्मध्यान की मिट्टी में बो कर फलवान बना रहे है या भोग विलासता की चट्टान में इसे नष्टभ्रष्ट कर रहे है।




मुनि श्री ने कहा कि दोनों तरह के लोग है और दोनों तरह का जीवन जो लोग अपने जीवन को सही दिशा देते है,उनका जीवन सार्थक होता है,और जो लोग मौज मस्ती और भोग विलास के चक्कर में खो जाते है उनका जीवन यूं ही नष्ट भृष्ट हो जाता है, संतों की यही एक प्रेरणा रही है कि हम अपने जीवन के मर्म को पहचाने और ध्येय को जानकर जीवन को सही दिशा प्रदान करें मुनि श्री ने कहा कि जन्म और जीवन पाना बहुत बड़ी उपलब्धि नहीं है सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण जीवन की दिशा है, संतो से हमें जीवन की दिशा और दृष्टि प्रेरणा और पथ मिलता है मुनि श्री ने कहा कि संतों के प्रति हम जो अनुराग भाव प्रकट करते है,उस अनुराग के साथ साथ हमें यह देखना है कि मेरे जीवन की दिशा क्या है?
दोपहर पश्चात शंकासमाधान कार्यक्रम संपन्न हुआ इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने शंका का समाधान करते हुये कहा कि “नये वर्ष की शुरुआत 31 दिसंबर की रात्री के 12 बजे न करते हुये 1जनवरी2026 के सूर्योदय के साथ करें उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में दिन की शुरुआत सूर्योदय के साथ होती है,अतःआप लोगों को लौकिक रुप से नये वर्ष की शुरूआत भारतीय सभ्यता के अनुसार सूर्योदय से ही करना चाहिये मध्यरात्री में दर्शन पूजन करना हमारी सभ्यता का प्रतीक नहीं है,अतः पश्चिमी सभ्यता का अनुसरण न करें”
इस अवसर पर कुंडलपुर तीर्थक्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्र कुमार जैन,महामंत्री आर के जैन, मोतीलाल जैन सहित कमेटी के पदाधिकारियों ने मुनिसंघ को बलेह में श्रीफल अर्पित करते हुये कुंडलपुर पधारने का अनुरोध किया इस अवसर पर
निर्माण कमेटी के पूर्व अध्यक्ष वीरेश सेठ जबलपुर ने भी श्री फल अर्पित करते हुये अपनी शंका का समाधान किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312










