केशोरायपाटन में प्रकट हुआ अतिशय -खण्डित प्रतिमा पुनः जुड़ी
केशोरायपाटन, 6 अप्रैल, रविवार ।
श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई उपासना चमत्कारी परिणाम देती है, यह किसी ग्रंथ की पंक्ति नहीं बल्कि एक ऐसी वास्तविकता है जो हाल ही में अतिशय क्षेत्र केशोरायपाटन में घटित हुई।
प्राचीन जिनबिम्ब खंडित हुआ, फिर पुनः जुड़ा
_4100 वर्ष प्राचीन बताए जा रहे केशोरायपाटन में प. पू. आर्यिका 105 श्री स्वास्तिभूषण माताजी की प्रेरणा से जैन मंदिर का नवनिर्माण चल रहा, उसी प्रयोजन से मूलनायक के अतिरिक्त अभी जिनबिम्बो को एक अस्थाई वेदी पर विराजमान किया हुआ है ।_
दुर्योग से 18मार्च को 12वी सदी की भगवान पार्श्वनाथ की 20×30 अवगाहना की प्रतिमा फिसलकर दो भागों में विभाजित हो गई ।_

सुयोग से तत्समय श्रमण मुनि108 श्री समत्वसागर जी महाराज का उसी दिन पदार्पण हुआ था तब कमेटी द्वारा उन्हें इस घटना से अवगत करवाया तो मुनिश्री ने निर्देश पर प्रतिमा को घी एवं बुरे में रखकर कर 72 घंटे अखंड णमोकार का पाठ किया, 21 से 29 मार्च तक प्रतिदिन 1 घंटे णमोकार का पाठ, 30मार्च से 5 अप्रैल तक कल्याण मंदिर स्तोत्र का पाठ एवं 6 अप्रैल को कल्याण मंदिर विधान के पश्चात मूर्ति को निकाला गया तो मूर्ति पुनः पूर्वावस्था में दर्शित हुई ।

जैसे ही मूर्ति को अखंड अवस्था में बाहर निकाला तो पूरा मंदिर परिसर भगवान पार्श्वनाथ एवं भगवान मुनिसुव्रतनाथ के जयकारों से गुंजायमान हो गया ।_
कोतूहल के साथ क्षेत्र पर श्रद्धालु दर्शन हेतु आने का क्रम शुरू हो गया है । आप भी ऐसे प्राचीन अतिशय क्षेत्र में ऐसे अतिशयकारी जिनबिंबो के दर्शन करें ।
प्रबंध कार्यकारिणी समिति
श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र केशोरायपाटन, जि. बूंदी से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

