चेहरे की सुंदरता पाउडर लगाने से नहीं मधुर मुस्कान और मीठी जुबान से होती है भावसागर महाराज
महाराजपुर
अष्टानिका महोत्सव के अंतर्गत मंगल प्रवचन देते हुए पूज्य मुनि श्री 108 भावसागर महाराज ने कहा कि अच्छा जीवन जीना स्वयं में बहुत बड़ी कला है और मीठा बोलना उसे कला का महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि बोलने की कला में ही लोकप्रियता का राज छिपा हुआ है। कुछ लोग वाणी के कारण औरों के दिलो से उतर जाते हैं कुछ इसी वाणी के चलते औरों के दिलों में बस जाया करते हैं।
महाराज श्री ने कहा कि हम इस तरह बोले की दूसरों का दिल आग आग नहीं, बाग बाग हो जाए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि चेहरे की सुंदरता पाउडर लगाने से नहीं मधुर मुस्कान और मीठी जुबान से होती है। आदमी की पहचान परिधान से नहीं जुबान से होती है। अगर जुबान पर घाव लग जाए तो 24 घंटे में ठीक हो जाता है पर जबान से घाव लग जाए तो 24 वर्ष भी कम पड़ जाते हैं। शरीर में सबसे अच्छी चीज भी जबान है। और बुरी चीज भी जबान है। यह जबान कैंची भी हैं, और सुई धागा भी। हम जबान से कैंची की तरह रिश्तो को काटे नहीं वरन सुई धागे की तरह टूटे रिश्तों को साधने की कोशिश करें।

इतिहास इस बात का गवाह है कि जहां रावण ने कड़वे वचनों के कारण अपने प्रिय धर्मात्मा भाई विभीषण को खो दिया था वहीं विभीषण ने मीठे वचनों से भाई के शत्रु राम को भी अपना बना लिया माता-पिता की ओर ध्यान दिलाते हुए महाराज श्री ने कहा कि माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को केवल चलना ही ना सिखाएं वरन बोलना भी सिखाए।

परिवार में सास, बहू, पिता,पुत्र, भाई भाई देवरानी जेठानी के बीच होने वाले झगड़े धन दौलत जमीन जायदाद के कारण कड़वी जबान के कारण ज्यादा होते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
