आर्यिका विज्ञानमति माताजी सानिध्य में लगभग 50 व्यक्ति कर रहे आठ उपवास की तप साधना माताजी ने उपवास के आध्यात्मिक एवम वैज्ञानिक लाभ बताए
बागीदौरा
अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत आर्यिका 105 विज्ञानमति माताजी सानिध्य में हो रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान में सोमवार को 64 अर्ध समर्पित किए गए। इसी के साथ सम्मेद शिखर महामंडल विधान भी किया गया जिसमें 25 टोंको के 75 अर्ध 112 परिवार द्वारा समर्पित किए गए।
अष्टानिका महापर्व का जैन दर्शन में विशेष महत्व है वहीं माता जी की तपस्या का प्रभाव यह है कि लगभग 50 व्यक्ति 8 उपवास की तप साधना में संलग्न है। इस अवसर पर माताजी ने उपवास का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक लाभ सभी को बताया उन्होंने कहा कि उपवास से अनुशासन बढ़ता है, शरीर और मन की शुद्धि होती है, सत्यता, मधुरता,और सद्भाव प्रगाढ़ होता है। नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और मन शांत रहता है। आत्मा का शुद्धिकरण होता है।

इंद्रियों पर नियंत्रण बढ़ता है। आत्मज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलती है। अहिंसा के सिद्धांत को बढ़ावा मिलता है। ध्यान और आत्म निरीक्षण से मानसिक शांति मिलती है।
उपवास से पाचन तंत्र सुधरता है। शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। आतों को आराम मिलता है। शरीर की पुनर्निमाण क्षमता बढ़ती है। कई रोगों से बचाव होता है। त्वचा स्वस्थ होती है। मृत कोशिकाएं पसीने के माध्यम से बाहर निकलती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
