आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने धर्मनगरी धरियावद में दी दीक्षा 76 वर्षीय भंवरलाल सरिया बने ऐलक श्री हर्ष सागर गुरु भक्त ने भी दीक्षा हेतु निवेदन किया
धरियावद।

प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री 108शांतिसागरजी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी धरियावद में संघ सहित विराजित है। इस बेला में दिनांक 9 मार्च को 76 वर्षीय श्री भंवरलाल सरिया 105 ऐलक श्री 105 हर्षसागर जी महाराज बने। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में बताया कि श्रीमद् जैनधर्म की यही विशेषता है कि इस धर्म में सम्यक दर्शन, सम्यकज्ञान, सम्यकचारित्र को धारण कर सिद्ध अवस्था को प्राप्त किया जा सकता है। सम्यकदर्शन और सम्यकज्ञान के बाद चारित्र अर्थात साधु जीवन अपनाना जरूरी है ,चर्या में परिवर्तन करना ही दीक्षा है, संसार की दौड़ से दूर होना दीक्षा है ।संसारी प्राणी इच्छाओं से ग्रसित है ,संसार रुलाता है ,दीक्षा लेकर शिष्य को गुरु संगति में रहना चाहिए ।जैन धर्म तीर्थंकर भगवान द्वारा प्रतिपादित, अनुमोदित, धारित श्रमण धर्म है। आज दीक्षार्थी गुरु और परिवार परंपरा अनुसार दीक्षा ले रहे हैं भंवरलालजी के गृहस्थ अवस्था के पिता भी दीक्षा लेकर मुनि श्री उदार सागर जी बने। शिष्य को दीक्षा लेकर गुरु के प्रति कृतज्ञता को दिल में समर्पण भाव के साथ धारण करने से साधना में सफलता मिलती है । यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने दीक्षा के अवसर पर प्रकट की । राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि हमने भी 18 वर्ष की उम्र में गृह त्याग कर 19 वर्ष में संसारी प्राणियों के दुख देख कर दीक्षा ली। सभी को गृहस्थी रूपी दलदल कीचड़ से निकलना चाहिए ।शिष्य को गुरु को अपना जीवन समर्पित करना चाहिए। ख्याति, नाम यश, पूजा से दूर रहना चाहिए ।दिगंबर जैन दशा हूमड़ समिति के तत्वाधान में आयोजित दीक्षा समारोह वर्धमान सभागार में आयोजित हुआ गुरु भक्त राजेश पंचोलिया ने बताया कि सौभाग्यशाली परिवार की 5 महिलाओं द्वारा चोक पूरण की क्रिया की गई। दीक्षार्थी भंवर लाल ने आचार्य श्री ने दीक्षा की याचना की तथा आचार्य श्री एवम समस्त साधुओ दीदी भैया श्रावक श्राविकाओं परिजनों तथा समाज से क्षमा याचना की।वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य नाथुलाल चंपावत परिवार को मिला। दीक्षा के वैराग्यमय प्रसंग से नगर रमेश दोषी ने भी दीक्षा हेतु श्रीफल चढ़ाया आपके दादाजी भी पूर्व में मुनि श्री सुधर्म सागर जी थे ।इस बेला में आचार्य श्री के द्वारा दीक्षार्थी के पंच मुष्ठी केशलोच किये गए तथा दीक्षा संस्कार मस्तक तथा हाथों पर किये गए। इसके बाद आचार्य श्री ने नामकरण किया। 76 वर्षीय भंवर लाल का दीक्षा उपरांत नूतन नाम ऐलक 105 श्री हर्षसागर महाराज किया गया। पिच्छी शैलेश वीरेंद्र दोषी, कमंडल नवीन भामावत, संदेश सरिया परिवार द्वारा शास्त्र भेंट किये गए। मंच संचालन मुनि श्री मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने किया । कार्यक्रम का सुंदर एवम प्रभावशाली संचालन अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंडित हंसमुख शास्त्री धरियावद ने किया। आपने नगर से पूर्व में दीक्षित सभी 13 साधुओं की गौरव पूर्ण जानकारी दी । आज दीक्षार्थी के केशलोच हो रहे थे, तब सभी वैराग्यमयी पलों से सभी द्रवित हो रहे थे। परिजनों के दोनों नेत्रों में एक नेत्र में खुशी के आंसू दूसरे नेत्र में दुख के आंसू भी थे। भक्तों के भजनों से वातावरण वैराग्य मय हो रहा था आचार्य श्री ,मुनि श्री पुण्य सागर जी मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवम् अन्य साधुओं ने दीक्षार्थी के केशलोचन किये।परिजनों एवम अन्य भक्त जिन्हें केशलोच झेलने का अवसर मिला। वह अपने को पुण्यशाली मान रहे थे ।आज प्रातःकाल दीक्षार्थी ने श्री जी के दर्शन कर पंचामृत अभिषेक पूजन किया, इसके पश्चात आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के दर्शन कर उनके चरणों का प्रक्षालन किया । आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवं साधुओं को आहार दिया साधुओं के आहार के बाद आचार्य वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में दीक्षार्थी सभा मंडप पहुंचे।
अनुठा संयोग
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने इसके पूर्व 39 मुनि,45 आर्यिका , 15 क्षुल्लक तथा 13 क्षुल्लिका तथा एक एलक दीक्षा सहित कुल 113 दीक्षा दी हैं। इसके पूर्व आचार्य श्री ने धरियावद में श्री मूर्तिमती माताजी को क्षुल्लिका दीक्षा दी थी। नवीन ऐलक श्री हर्ष सागर जी के गृहस्थ अवस्था के पिता की क्षुल्लक दीक्षा भी धरियावद में हुई । कार्यक्रम में पारसोला, गामड़ी मुगाना, खूता,नरवाली,बांसवाड़ा,उदयपुर,,इंदौर सनावद,आदि अनेक नगर से भक्त पधारे।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
