धर्म रूपी मार्ग का अनुसरण कर आत्मा को परमात्मा बनाने का प्रयास करें आचार्य वर्धमान सागर जी

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धर्म रूपी मार्ग का अनुसरण कर आत्मा को परमात्मा बनाने का प्रयास करें आचार्य वर्धमान सागर जी

एक भव्य आत्मा गुरु चरण को प्राप्त कर गुरु जैसे स्वरूप को प्राप्त करेंगे ।संस्कार जीवन में भव्यता प्रदान करते हैं, संयम की बाधाओं को सहन कर करके आदेश्वर जी जीवन को सार्थक करेंगे ।संसार दुख मय है भोले प्राणी सुख की खोज संसार में करते हैं यही अज्ञानता है सच्चा सुख सास्वत सुख है जहां कभी दुख नहीं रहता है वह सिद्ध अवस्था होती है। उसका संयम दीक्षा एक मार्ग है इस मार्ग पर चलकर सिद्ध अवस्था को प्राप्त कर सकते हैं ।संसार का प्राणी अपनी आत्मा को भूलकर दुख का पात्र है अनादिकाल से संसार में भटक रहा है भयानक वन रूपी संसार में भटक रहा है ।आदेश्वर जी इन्हीं बातों पर विचार कर दीक्षा ले रहे हैं ।दीक्षा मानव जीवन में सच्चे सुख की पहली सीढ़ी है। सम्यक दर्शन ,ज्ञान, चरित्र रत्न त्रय धर्म से सुख मिलता है ।सम्यक दर्शन से सुख प्राप्त कर सकते हैं संसार में सुखी रहने के कुछ पद स्थान है जहां सुख प्राप्त हो सकता है ,दीक्षा वह पद है जहां से सुख मिलता है।

 

 

 

 

दीक्षा योगियों की जननी है जैसे माता जन्म देती है वैसे ही दीक्षा योगी को जन्म देती है इससे लक्ष्य की प्राप्ति होती है। आचार्य श्री ने सरल उदाहरण से बताया कि एक कृषक खेती में कठोर भूमि पर हल चलाकर उसे कोमल बनाकर बीजारोपण करता है और उसे उसे फसल रूपी फल प्राप्त होता है इसी प्रकार है भव्य जीवो आपकी आत्मा भूमि कठोर है इसे नरम करने के लिए दीक्षा रूप धर्म से कोमल बनाया जाना चाहिए और संयम तपस्या के बीज डालकर मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं । सभी जीव अनादिकाल से संसार में भ्रमण कर थक जाते हैं थकने पर वह विश्राम स्थल अपने घर पर विश्राम करते हैं दीक्षा भी अनुपम आराम स्थली रूपी घर है जिससे वास्तविक घर सिद्धालय की प्राप्ति होती है ।आचार्य श्री शिव सागर जी कहते थे कि मनुष्य को घर से खड़े-खड़े निकलना चाहिए आडे होकर नहीं निकलना चाहिए इसका आशय यही है श्रावक मानव की मृत्यु होने पर उसे लेटा कर मृत्यु सैया पर बाहर ले जाते हैं ,किंतु जो व्यक्ति दीक्षा लेते हैं वह खड़े-खड़े जाकर दीक्षा लेते हैं। आज आदेश्वर जी ने मोक्ष मार्ग पर अपने कदम बढ़ाए हैं सभी को तीर्थंकर द्वारा प्रतिपादित धर्म रूपी मार्ग का अनुसरण कर आत्मा को परमात्मा बनाने का पुरुषार्थ करना चाहिए।

 

शुद्ध जैन भोजन के साथ यात्रा
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प्रचार मंत्री गौरव पाटनी राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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