बाबा रामदेव ने लिया निर्यापक मुनि श्री वीर सागर महाराज का मंगल आशीर्वाद

धर्म

बाबा रामदेव ने लिया निर्यापक मुनि श्री वीर सागर महाराज का मंगल आशीर्वाद
रामटेक
धर्म नगरी रामटेक में आज बाबा रामदेव ने निर्यापक श्रमण मुनि 108 श्री वीरसागर जी महाराज के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद एवं उनसे मार्गदर्शन प्राप्त किया।

 

निश्चित रूप से रामटेक धर्म और संस्कृति की पावन भूमि है यहां पर एक ऐतिहासिक क्षण साकार रूप ते थे परिलक्षित हुआ जिन्होंने योग को विश्व तक पहुंचाने का कार्य किया
ऐसे योगऋषि बाबा रामदेव और आचार्य भगवन विद्यासागर जी महाराज के प्रिय शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि 108 श्री वीरसागर जी महाराज का भव्य समागम हुआ।

इस दिव्य समाग़म से संपूर्ण वातावरण धर्म, अध्यात्म और संस्कारों की सतरंगी आभा से आलोकित हो रहा था

आचार्य भगवन विद्यासागर महाराज मेरे प्रेरणा स्रोत रहे हैं बाबा रामदेव
इन पलों में योग गुरु बाबा रामदेव भाव विभोर दिखे और आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की ओर अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि आचार्य भगवन विद्यासागर जी महाराज मेरे जीवन के प्रेरणा स्रोत रहे हैं। जब उन्होंने कहा कि आज मुझे उनकी दिव्य छवि निर्यापक श्रमण मुनि 108 श्री वीर सागर जी महाराज में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। सभी गदगद हो गए।

इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति और शिक्षा में मूल्यों की पुनर्स्थापना को लेकर निर्यापक मुनि श्री से भारतीय शिक्षा बोर्ड’
के माध्यम से भारतीय धर्म, संस्कृति और संस्कारों को शिक्षा प्रणाली में शामिल करने पर विस्तृत चर्चा की। उनका मानना है कि आज की युवा पीढ़ी जो पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव में अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है, उसे भारतीय संस्कृति की पावन शिक्षा रूपी जल से अभिसिंचित करना आवश्यक है।

चर्चा के उपरांत यह lनिकल कर सामने आई की शिक्षा में जैन धर्म के सार्वभौमिक और जीवनोपयोगी संस्कारों को किस प्रकार सम्मिलित किया जाए और भारतीय संस्कृति को शिक्षा प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। इसी के साथ बाबा रामदेव ने पूज्य मुनिश्री वीरसागर जी महाराज से निवेदन किया उनके मार्गदर्शन में ही यह कार्य सम्पन्न हो।*

 

बाबा रामदेव और निर्यापक मुनि श्री वीर सागर जी महाराज की इस ऐतिहासिक भेंट ने भारतीय शिक्षा पद्धति को एक नई दिशा देने का संदेश दिया है। यह समागम भारत को एक बार फिर विश्वगुरु”* के गौरवमयी पद पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

 

कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि यह दिव्य चर्चा भारतीय संस्कृति और शिक्षा में एक नए युग का आरंभ है जो आने वाली पीढ़ियों को धर्म और संस्कारों की अमूल्य धरोहर सौंपेगा।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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