धर्म को असीम कर दो पाप की सीमा करो–सुधासागरजी महाराज
त्रिकाल चौबीसी जिनालय का हुआ भव्य शिलान्यास
कटनी–
पाप की सीमा कर दो, धर्म को असीम कर दो। जबकि लोग उल्टा करते हैं धर्म को सीमित कर दिन रात पाप की प्रवृत्ति में लगे हैं। संसार से बचना है तो हमको पाप की प्रवृत्ति रोकना होगा, और दया धर्म को असीम करते चले जाना होगा। हम जानते हैं कि कहां पुण्य मिलने वाला है, और कहा पाप लगेगा। जगत में ऐसा कोई नहीं है जो ये ना जानता हो कि मैं कर क्या रहा हूं जानकर पाप की ओर अग्रसर होना ठीक नहीं है। पुण्य की क्रियाएं करो। उक्त आशय के उद्गार चेतनोदय तीर्थ गौशाला परिसर में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागर महाराज ने व्यक्त किए।
आज जो शिलान्यास करेंगा वह गुरु देव के आशीर्वाद सान्निध्य का लाभ लेगा

धर्म सभा में मध्य प्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुगंव श्री सुधासागर महाराज ससंघ, मुनिश्री वीर सागर महाराज, मुनि श्री पूज्य सागर, मुनि श्री विशाल सागरज, मुनि श्री धवल सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में त्रिकाल चौबीसी जिनालयों का भव्य शिलान्यास होने जा रहा है। परम पूज्य गुरुदेव के सान्निध्य में जो भी परिवार शिलान्यास करना चाहते हैं अभी नाम दे दै तो गुरु देव के आशीर्वाद के साथ सान्निध्य का भी लाभ आपको मिल जाएगा। ये ऐसा अवसर है जब शिलान्यास समारोह में एक नहीं दो दो संघों के सान्निध्य का लाभ आप सभी को मिल रहा है। इस दौरान देवेन्द्र कुमार, पवन जैन धुर्रा अशोकनगर,चन्द्र सेन जैन भोपाल, श्री मति अरुणा जैन पुना ने श्री फल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

पहले मुनि राज को आहार देते हो ऐसे ही मन्दिर को दें
इसके पहले धर्म सभा में मुनि पुगंव ने कहा कि आप आहार बनाते है तो पहले महाराज जी को देंगे। बाद में बचा हुआ खाते हैं। और फिर बचता है वह अगले दिन बासी करके भिखारी को देते हैं।ऐसा मन्दिर में मत देना।क्योकि बचा हुआ मन्दिर को नहीं दिया जाता है। मार्मिक शब्दों में कहा मन्दिर को बचा हुआ दिया गया तो उतना ही पुण्य लगेगा, जितना पुण्य भिखारी को देने में लगेगा। इसलिए मन्दिर जी को दान मुनि महाराज को दिये हुए आहार की तरह देना तो वह बहुत फलेगा।

तुम रोटी के पीछे हो और रोटी उनके पीछे है
उन्होंने कहा कि तुम रोटी के पीछे हो, और रोटी उनके पीछे।उन्होंने कहा रोटी जिनके पीछे है वह भिक्षु है, और जो रोटी के पीछे है वह भिखारी है।
संस्मरण को सुनाया
उन्होंन कटनी का एक संस्मरण सुनाते हुए कहा की, एक संस्मरण याद आ गया। इसी कटनी में आपके पंडित जी जगन मोहन लाल जी पड़ गाहन कर रहे थे, पुरा संघ निकल गया वह एक भिखारी उनसे रोटी खिलाने को कहता है, तो पंडित जी अन सुना कर देते हैं। उसी समय ऐलक परमसागरजी का निकलना हुआ, पंडित जी दौड़ कर पडगाहन के लिए गए, तब वह गिरते गिरते बचे। और महाराज भी नहीं रुके हम ही वही थे। जब भिखारी ने फिर कहा तब पंडित जी ने कहा इनके पीछे रोटी है, और तुम रोटी के पीछे हो। यह पुरी घटना आचार्य श्री को सुनाई। वह बात याद आ गयी।
उन्होंने आगे कहा कि सन 1980 मुक्तागिरि की ओर विहार हो रहा था, शायद मुल्ताई के आस पास की बात होगी। घरों में सबसे पहले छोटो को खिलाया जाता है। और हमारे यहां सबसे पहले बड़ो को खिलाया जाता है। तब आचार्य श्री ने कहा कि संसार में मोह है, मोह के कारण छोटों को पहले भोजन दिया जाता है।यहां पूजता है, पूज्य स्थान पर पहले स्थान बड़ो को दिया जाता है।

अलोभ वृत्ति से जो दान देता है उसके अक्षय भंडार भरे रहते हैं
उन्होंने कहा कि जो दान देता है उसके अक्षय भंडार भरे रहते हैं, लेकिन आज ऐसा नहीं हो रहा क्यों कि आज लोभ प्रवृति आ गई। अलोभवृत्ति होती तो भंडार भरे रहते थे, आज भी हो सकता हैं।
दृष्टांत के द्वारा मुनि श्री ने बताया एक व्यक्ति ने मकान के लिए पैसे को जोड़ लिया है,वो बहुत गरीब है। लेकिन उसने कहा कि महाराज जी मकान तो फिर भी बन जायेगा, मन्दिर बनाने का सौभाग्य नहीं मिलेगा। बहुत निवेदन करने पर उसे आशीर्वाद दिया, कुछ दिन बाद उसके खेत के पास से हाइवे निकल गया। जिसकी कोई सम्भावना ही नहीं थी। मकान भी बन गया। और मन्दिर भी बन गया। उन्होंने कहा कि पहले करोंगे तो मंगल होगा।बाद में किया तो वह फल नहीं मिलता। जो मिलना चाहिए। मन्दिर को पहले दो, भंडार फिर देखना।धर्म को सीमित मत करना, कभी यहां मत कहना मेरी श्रद्धा इतनी है। ये मिथ्या दृष्टि है। इतना शक्ति इतनी हैं फलेगा। धर्म को कभी सीमा में मत बांधना। धर्म को असीम करते चले जाना।
सकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
