गुणों को जानकर उन्हें प्रयत्न करना सीखना चाहिए प्रणम्य सागर महाराज
किशनगढ़
परम पूजनीय अर्हम योग प्रणेता मुनि श्री प्रणम्य सागर महाराज ने आरके कम्युनिटी सेंटर में मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि भगवान की भक्ति से सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते है। अपने दोषों को मूल रूप से निर्दय होकर नष्ट करता है।
महाराज श्री ने कहा भगवान के गुणों को देखना चाहिए। आत्मा में अनंत गुण होते है। जिस आत्मा ने गुणों को प्रकट कर लिया वह आत्मा परमात्मा बन जाती है। गुणों को जानकर उन्हें प्रकट करना सीखना चाहिए। परमात्मा अनंत गुणों के धारी होते हैं। पूर्व आचार्य के बताए मार्ग से ही प्रभु की भक्ति करनी चाहिए। दोषों को नष्ट करने पर ही गुण प्रकट होते है। भगवान से जुड़ने के लिए अपने दोषों को मूल रूप से नष्ट करना पड़ता है।

धर्म को अपनाने पर जीवन का कल्याण होगा। धर्म करने की नहीं जीने की चीज है। स्वयं की आत्मा का ध्यान करने पर जीवन सार्थक होगा। आत्मा की साधना के बिना धर्म नहीं होता है।
शनिवार से शुरू हो रहे तीन दिवसीय अर्हम स्वात्म साधना शिविर
की जानकारी देते हुए महाराज श्री ने बताया की स्व आत्मा की साधना करने के लिए ही ध्यान योग शिविर का आयोजन किया जा रहा हैं। जिसमें अंतरंग में आत्मविश्वास जागृत करने की कला सिखाई जाएगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
