विदिशा के इष्ट देवता वर्रो बाले बाबा के नये मंदिर की वेदी का शिलान्यास शीतलधाम में हुआ संपन्न “पाठशाला के निमित्त से ज्ञान दान मिलता है”-मुनि श्री सम्भवसागर
विदिशा ः
संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागरजी महामुनिराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम में भगवान श्री आदिनाथ स्वामी का पाषाण से बने नवीन जिनालय में मूल वेदी तथा दोनों ओर खड़गासन प्रतिमाओं के लिये दो अन्य वेदियों का शिलान्यास निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर मुनि श्री निस्सीम सागर,मुनि श्री संस्कार सागर महाराज ससंघ सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्र. अविनाश भैया भोपाल एवं पं. महेंद्र जैन विदिशा के निर्देशन में संपन्न हुआ प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया इस भव्य जिनालय को विदिशा नगर के श्रैष्ठी मोहन जैन नमकीन, एवं अशोक जैन सागर वाले परिवार ने अपनी चंचला लक्ष्मी का उपयोग करते हुये निर्माण कर समाज को समर्पित कर दिया है उपरोक्त मंदिर कुंडलपुर के भव्य मंदिर की तर्ज पर पाषाण से तैयार किया गया है जिसके गर्भग्रह में शीतलधाम के अधिष्ठाता मूलनायक भगवान आदिनाथ बर्रो वाले बाबा विराजमान होंगे तथा उनके एक ओर भगवान मुनिसुव्रतनाथ एवं दूसरी ओर अन्य भगवान विराजमान होंगे तथा गर्भग्रह के बाहर दौनों ओर दो खड़गासन प्रतिमाएं विराजमान होंगी।
इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज ने कहा हमने आपने आचार्यश्री ज्ञान सागर महाराज को नहीं देखा लेकिन आचार्य श्री की निगाहों से तथा उनके श्री मुख से दादागुरु के बारे में जितनी बातें सुनी है, वह हमारे स्मृति पटल पर उभर रही है उन्होंने कहा कि एक बार हमने गुरु जी से पूछा कि जैसे हम आपसे बात कर लेते है, क्या आप भी अपने गुरुजी से ऐसे ही बात करते थे? तो उन्होंने कहा कि हम तो ठहरे दक्षिण के कन्नड़ भाषी और गुरुजी थे संस्कृत के विद्वान तथा उनकी भाषा पूरी मारवाड़ी थी जब हमारी मुनि दीक्षा हुई तो हमारी उम्र 22 वर्ष से भी कम थी मुनि श्री ने कहा कि आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज 80 वर्ष की वृद्धावस्था को छू रहे थे वह धीर वीर और गम्भीर थे हमेशा अपनी गर्दन झुकाऐ बैठे रहते थे जैसे कि हम लोग आचार्य श्री को बैठे देखते है।
मुनि श्री ने कहा कि दोनों विद्वानों में कितनी गम्भीरता थी यह आप सभी समझ सकते है,और उनका अपने गुरु के प्रति ऐसी विनय समर्पण तथा अनुशासन था जो भूतो न भविष्यति ऐसा समर्पण किसी और में नहीं देखा उन्होंने कहा कि आचार्य श्री ने अपने गुरु की ऐसी सेवा की है जो एक अमीर आदमी भी अपने पिता की उतनी सेवा नहीं कर सकता और उसी सेवा के फल स्वरूप गुरु ज्ञानसागर महाराज ने जो आशीर्वाद दिया कि पूरा संघ गुरुकुल बन गया उन्होंने 130 मुनि दीक्षा तथा 200 के लगभग आर्यिका दीक्षा प्रदान की तथा संपूर्ण बुन्देलखण्ड को ही गुरुकुल बना दिया जहा पर सेंकड़ों की संख्या में ब्रहम्चारी एवं ब्रहम्चारणिया तथा हजारों की संख्या में त्यागीवृति श्रावक श्राविकाएं है मुनि श्री ने कहा कि आचार्य गुरुदेव इस धरा पर आये इसीलिए आज भगवान शीतलनाथ का विशाल समवसरण खड़ा हो गया उन्होंने सन् 2008 की स्मृतियों को ताजा करते हुये कहा कि जब हम लोग गंजवासोदा में थे तब गुरुजी को बताया गया कि वर्रों में भू गर्भ से निकली अतिशयकारी आदिनाथ भगवान है,और वह विदिशा में पधार रहे है तो आचार्य भगवन् उन वर्रो वाले आदिनाथ भगवान की अगवानी करने विदिशा पधारे और उन्होंने जब आदिनाथ भगवान को देखा तो वह उनको देखते ही रहे अभी जो कमलासन पर आदिनाथ भगवान विराजमान है। उस कमलासन पर विराजमान कर उच्चासन प्रदान किया था और कहा था कि इस प्रतिमा में इतनी अधिक ऊर्जा है कि उनके लिये एक भव्य मंदिर बनना चाहिये तो गुरुदेव के आशीर्वाद से ही यह नया मंदिर आज पूर्ण बनकर तैयार है और उसी मंदिर के भव्य वेदी का शिलान्यास संपन्न होंने जा रहा है।

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि आज तीन वेदियों का शिलान्यास संपन्न हुआ मूल वेदी भगवान आदिनाथ स्वामी वर्रों बाले बाबा की रहेगी जिसका शिलान्यास मंदिर निर्माण कर्ता परिवार मोहन नमकीन एवं अशोक जैन सागर वाले परिवार द्वारा किया गया तथा उसके आगे दो खड़गासन प्रतिमाएं जैसे कुंडलपुर के बड़े बाबा के आगे भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा है उसी तर्ज पर स्थापित की जाएगी उनका भी शिलान्यास किया गया इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।



इस बेला में आचार्य ज्ञानसागर विधान संपन्न हुआ एवं आहार चर्या शीतलधाम से ही संपन्न हुई। सोमवार को प्रातःप्रवचन एवं आहारचर्या स्टेशन जैन मंदिर से ही संपन्न होगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





