वैराग्य पथ की कठिन परीक्षा है केशलोच –
उपाध्याय दयाऋषि महाराज
खरका
आचार्य कुशाग्रनंदी महाराज के शिष्य उपाध्याय दयाऋषि महाराज का केशलोचन आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर मे शनिवार प्रातः धर्मसभा में हुआ ।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपाध्याय दयाऋषि महाराज ने कहा कि जैन धर्म में साधुत्व यानी कठिन साधना का पथ। इसी कठिन साधना का एक पथ है केशलोंच। हमारा एक बाल टूटते ही हम कराह टूटते है और बाल तोड़ बीमार कर देता है। वहीं, जैन संत अपने हाथों से न सिर्फ सिर के बाल, अपितु मूंछ और दाढ़ी के बाल भी एक-एक पल भर में तोड़ देते हैं। ऐसा नहीं कि हर एक बार की विधि हैं। साल में तीन से चार बार केशलोंच की परम्परा होती ही हैं। जैन संत अपने हाथों से घास फूस की तरह सिर, दाढ़ी व मूंछ के बाल को आसानी से उखाड़ देते हैं। यह पल देखते ही कई श्रद्धालु भी भाव विभोर हो जाते है। जैन साधु की कठिन तपस्या में केशलोंच भी मूलगुण में शामिल है। जैन साधु जब केशलोंच करते है तो आत्मा की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है।अपने आत्म सौंदर्य बढ़ाने के लिए कठिन साधना करते हैं। धर्मसभा मे
केशलोच झेलने की बोली का लाभ महेंद्र खरकिया परिवार ने लिया। प्रवक्ता अनिल स्वर्णकार ने बताया कि उपाध्याय दयाऋषि महाराज को शास्त्र, कमण्डल और पिच्छी महेंद्र इसरावत परिवार ने भेट की। पाद प्रक्षालन खेमराज खरकिया ने, मंगलआरती छोगालाल उदावत ने और शांतिधारा तेजपाल खरकिया परिवार ने की।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
