सच्ची श्रद्धा और समर्पण से ही आत्मा का असली रूप प्रकट होता है सुनील सागर महाराज
मूंगाणा
परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनील सागर महाराज सानिध्य में सिद्ध चक्र महामंडल विधान के अंतर्गत मंगल प्रवचन में भगवान के रूप और भक्ति के महत्व पर गहरी बातों को सांझा किया उन्होंने कहा कि भगवान का रूप सर्वव्यापी है। जैसा ऋषभदेव ने कहा भगवान यही है, मार्ग यही है, और कल्याण केवल इसी मार्ग से संभव है।
उन्होंने कहा कि जब हम केवल प्रभु की भक्ति करते हैं और संसार के रिश्तो से ऊपर उठकर जीवन के उद्देश्य को समझने की कोशिश करते हैं तो जीवन की सच्चाई का एहसास होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे संसार के रिश्तों में माता-पिता, भाई बहन, पति-पत्नी में मोह बांधते हैं, वैसे ही अगर हम भगवान के साथ अपने रिश्तों को उतनी ही श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाए तो हमारा जीवन सार्थक हो सकता है।
महाराज श्री ने कहा कि हमने संसार के कई रिश्तों को निभाया है, लेकिन क्या हमने भगवान के साथ रिश्ते को भी उतना ही सच्चे मन से निभाया?
जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है, यदि सही मार्ग पर चलने का
दृढ़ संकल्प हो। उन्होंने धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक साधना की महत्ता पर जोर दिया। सच्ची श्रद्धा और समर्पण से ही आत्मा का रूप प्रकट होता है।
- जो लोग संयमित जीवन जीते हैं,भक्ति में डूबे रहते हैं, वे सब


कठिनाइयों और बाधाओं को पार कर सकते है। सिद्ध भगवान की कृपा और उनके अद्भुत पुरुषार्थ से ही हम अपने जीवन के सबसे बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ सकते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
