धार्मिक संस्कार नहीं होने से अच्छे बुरे का ज्ञान नहीं रहता है विकाम्या श्री माताजी
बांसवाड़ा
जिन बच्चों को धार्मिक संस्कार नहीं मिलते, उन्हें अपने अच्छे बुरेका ज्ञान नहीं रहता है। जिससे वे गलत मित्रों की संगत से बुरे कार्यों की तरफ अग्रसर हो जाते हैं।
उक्त विचार गणाचार्य विराग सागर महाराज की शिष्या आर्यिका 105 विकाम्याश्री माताजी ने संस्कार शिविर समापन कार्यक्रम में व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के माता-पिता बच्चे के बचपन व युवा अवस्था में ही धर्म के संस्कार दे देते, तो वह कुछ भी गलत करने से पहले अवश्य सोचता। साथ ही गलत कृत्य करने से डरता है। जबकि जिन बच्चों को धार्मिक संस्कार नहीं मिलते उन्हें अपने न अच्छे बुरे का ज्ञान नहीं रहता और वे गलत मित्रों की संगत से बुरेकार्यों की तरफ अग्रसर हो जाते हैं। हमे बच्चों रूपी समाज की नींव कोमजबूत बनाना है। तभी हमारा समाज और राष्ट्र उन्नति की तरफ बढ़ सकता है।
समाज के प्रवक्ता महेंद्र कवालिया ने बताया कि गुरुमां द्वारा सुबह बच्चों को कहा किविनय पांच प्रकार की होती है।ज्ञान, दर्शन, तप, चारित्र, उपचारइन पांचों विनय के बारे मे बच्चों को विस्तार से बताया कि किस तरह हमें इसका पालन करना चाहिए। शिविर में सभी बच्चों ने बुरीसंगत नहीं करने, व्यसन नहीं करने और सद आचरण अपनाने का नियम लिया। शिविर के दौरान हुई प्रतियोगिताओं प्रश्नोत्तर, भजन प्रतियोगिता, चित्रकला, कराटे,व्यायाम, योग के साथ धर्म संस्कारसीखने में बच्चों ने रुचि दिखाई।संचालन महिपाल शाह ने किया।
