पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधा सागर महाराज से जुडा 1996 का एक संस्मरण शोभित जैन रामगंजमंडी की कलम से
बात सन 1996 की है, जब जयपुर में भट्टारक जी की नसियां में निर्यापक मुनि पुंगव सुधासगर जी का चातुर्मास होने जा रहा था। चातुर्मास की स्थापना से पूर्व मुनि श्री के प्रवचन के लिए एक विशाल पांडाल नसियां जी में बनाया गया था। कमेटी के आग्रह पर मुनि श्री पंडाल देखने पहुंचे। पांडाल को देखने के बाद गुरुदेव केवल इतना बोले..” यह छोटा नहीं पड़ेगा ?”
कमेटी वाले हंसने लगे ..बोले “महाराज श्री इसमें बीस हजार लोग एक साथ बैठ सकते है। इतना बड़ा पंडाल भी यहां पहली बार बना है। “
गुरुदेव कुछ नहीं बोले और सिर्फ मुस्कुरा दिए। अगले दिन गुरुवर की सिंह गर्जना उस भट्टारक की नसिया के पंडाल में शुरू हुई। एक सप्ताह भी नहीं बीता कि वो पंडाल तो पूरा भर ही चुका था, बाहर खड़े होकर प्रवचन सुनने वाले लोगों की संख्या भी कम नहीं थी। मुनि श्री के प्रवचनों को सुनने हजारों की संख्या में सुधि श्रावक प्रतिदिन आते। इतना ही नहीं , आश्चर्य तब हुआ जब गुरुवर के प्रवचन के कैसेट्स की मांग बड़ी मात्रा में आने लगी।
आखिर जयपुर की दुकानों पर भी गुरुदेव के प्रवचन की ऑडियो कैसेट्स बिकने लगी।

जयपुर का वह चातुर्मास आज भी जयपुर वासियों के जेहन में है। यही से गुरुदेव की ख्याति पूरे राजस्थान में फैलने लगी।
वर्तमान में देश को सर्वाधिक विद्वान प्रदान करने वाला


श्रमण संस्कृति संस्थान,सांगानेर भी उसी चातुर्मास की ही देन है। पूज्य निर्यापक संत सुधासगर जी की महिमा और उनके अनंत उपकारों को इस लेखनी से लिखना कैसे असंभव है। शत शत नमन गुरुवर..!!
“शोभित जैन ” रामगंजमंडी से प्राप्त आलेख
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
