खरतरगच्छाधिपति आचार्य मणीप्रभ सूरीश्वरजी की माता साध्वी रतनमाला श्री जी को सकल जैन श्वेतांबर संघ ने गुणानुवाद सभा एवं नवकार मंत्र का जाप कर दी श्रद्धांजलि

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खरतरगच्छाधिपति आचार्य मणीप्रभसूरीश्वरजीकी माता साध्वी रतनमाला श्री जी को सकल जैन श्वेतांबर संघ ने गुणानुवाद सभा एवं नवकार मंत्र का जाप कर दी श्रद्धांजली 
रामगंजमंडी
रामगंजमंडी के बाजार नंबर 3 में स्थित श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर के सभागार कक्ष में दिनांक 12 दिसंबर को खरतरगच्छाधिपति आचार्य मणीप्रभ सूरीश्वर और बहिन महाराज साध्वी डॉक्टर विद्युतप्रभा श्रीजी की माता साध्वी रतनमाला श्री जी महाराज साहब का 84 वर्ष की आयु में शत्रुंजय तीर्थ पालीताना में देवलोक हो जाने पर सकल जैन श्वेतांबर श्री संघ की तरफ से गुणानुवाद सभा एवम नवकार मंत्र का जाप करके भावभीनी श्रद्धांजली दी गई।
श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर श्रीसंघ ट्रस्ट के अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि साध्वी रतनमाला श्रीजी का जन्म सन 1940 में राजस्थान के बाड़मेर जिले के मोकलसर गांव में हुआ उनका सांसारिक नाम रोहिणी देवी था साध्वी जी के पिता का नाम हेमराज पालरेचा और माता का नाम गजरादेवी था। 16 वर्ष की आयु में उनका विवाह मोकलसर निवासी पारसमल लूंकड से हुआ साध्वी जी जब 22 वर्ष की थी तब उनके पति पारसमल लूंकड का स्वर्गवास हो गया उनके एक लड़का एवं एक लड़की उस समय कम उम्र के थे पति के स्वर्गवास के बाद रोहिणी देवी ने 32 वर्ष की उम्र में सन 1972 में गुरुदेव कान्तिसागर सूरीश्वर की पावन निश्रा में संयम पथ अपनाकर दीक्षा ग्रहण की और साध्वी रतनमाला श्री नाम पाया।
अपने दोनों बच्चों के साथ शत्रुंजय तीर्थ पालीताना में दीक्षा ग्रहण की।     
जैन शास्त्रों के अनुसार शत्रुंजय तीर्थ पालीताना का अपना विशेष स्थान है साध्वी रतनमाला ने अपने 10 वर्षीय लड़के एवं 8 वर्षीय लड़की के साथ गुरुदेव कान्तिसागर सूरीश्वरजी से एक साथ दीक्षा ली वर्तमान में उनके लड़के खरतरगच्छाधिपति आचार्य मणीप्रभ सूरीश्वरजी है जिन्होंने अभी तक लगभग 300 मंदिर और दादाबाड़ी की प्रतिष्ठायें करवाई हैं। साथ ही जहाज मंदिर मांडलवा अंबिका पार्श्वनाथ तीर्थ उज्जैन, कुशल वाटिका बाड़मेर, अमर सागर जैसलमेर गजमंदिर केसरिया जी जैसे अनेक तीर्थ का निर्माण करवाया एवं लड़की परम विदुषी डॉक्टर विद्युतप्रभा श्रीजी हैं।
अपने जीवन काल में साध्वी रतन माला श्री जी ने 52 चातुर्मास किये जिनमें से 22 चातुर्मास आचार्य मणीप्रभ सूरीश्वरजी एवं विद्युतप्रभा श्री जी ने साथ किये 30 चातुर्मास उन्होंने दूसरी साध्वियों के साथ किये साध्वी रतनमाला श्री जी का अंतिम चातुर्मास सन 2024 में सूरत में हुआ अपने लड़के और लड़की के साथ सूरत से पालीताना के विहार में पालीताना में स्थित शत्रुंजय तीर्थ की पावन धरा पर श्री जिन हरिविहार धर्मशाला में मिगसर सुदी बारस को दोपहर में देवलोक गमन हुआ श्री संघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि साध्वीजी की जहा दीक्षा हुई उसी जगह कालधर्म हुआ।

सूरत से पालीताणा विहार करते हुए साध्वी रतन माला जी

शत्रुंजय तीर्थ की महिमा
जैन शास्त्रों एवं ज्ञानियों द्वारा बताया गया है कि शत्रुंजय तीर्थ से अनगिनत आत्माए देवलोक गमन के बाद सीधे मोक्ष में गई हैं। गुणानुवाद सभा में उपस्थित लोगों ने कहां की साध्वी रतनमाला श्रीजी का देवलोक गमन शत्रुंजय तीर्थ पालीताना की पावन धरा पर हुआ है। वे निश्चित रूप से सिद्धशिला के स्थान को ग्रहण करेंगी शत्रुंजय तीर्थ को सिद्धों की भूमि कहा जाता है। साध्वी रतनमाला श्रीजी ने अपने पूरे संयम जीवन में एक हाथ में नवकार महामंत्र की माला रखी और उसका जाप किया वही जीव दया के प्रति गहरी रुचि रखकर जीव दया के लिए लोगों को प्रेरित किया।
साध्वी मां का जीवन बांसुरी जैसा
आचार्य मणीप्रभ सूरीश्वरजी 28 नवंबर को गुजरात के मणीलक्ष्मी तीर्थ पर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख,दिलीप तिल्लानी, राजेंद्र रांका, शैलेंद्र कटारिया, आचार्य महाराज, उनकी मां महाराज और बहन महाराज के दर्शन वंदन के लिए गए तो आचार्य

28 नवंबर को आचार्य श्री के दर्शन वंदन करते हुए रामगंज मंडी श्री संघ के अध्यक्ष और सदस्य

खरतरगच्छाधिपति आचार्य मणीप्रभ सूरीश्वरजी ने चर्चा के दौरान कहां की उनकी माता रतन माला श्री जी का पूरा जीवन बांसुरी की तरह रहा जिस तरह बांसुरी में गांठ नहीं होती, बांसुरी खाली और पोली होती है बांसुरी जब भी बोलती है मीठा बोलती है, बांसुरी बजने में भेद नहीं करती चाहे अमीर बजाए या गरीब बजाए जब बजाओ तब ही बोलती है व्यर्थ नहीं बोलती आचार्य श्री ने अपनी माता का जीवन बांसुरी की तरह बताया वही विदुषी साध्वी डॉक्टर विद्युत प्रभा श्री जी ने कहा कि हमें अपनी मां की कोख पर गर्व है उन्होंने हमें अपने साथ जिन शासन को समर्पित किया।
एक ही परिवार के 6 सदस्य संयम पथ पर
गुणानुवाद सभा में श्री संघ के अधिकतर वक्ताओं ने बताया कि मोकलसर के लूंकड परिवार से साध्वी रतनमाला श्रीजी, खरतरगच्छाधिपति आचार्य मणीप्रभ सूरीश्वरजी, साध्वी डॉक्टर विद्युतप्रभा श्रीजी, उपाध्याय मनितप्रभ सागर जी, साध्वी नीलांजना श्रीजी, साध्वी आराध्य रुचि श्रीजी को सोपकर जिन शासन का गौरव बढ़ाया है।
पूर्व पार्षद साक्षी पारख से विशेष लगाव  गच्छाधिपति आचार्य मणीप्रभ सूरीश्वरजी, साध्वी डॉक्टर विद्युत प्रभा श्री जी, और साध्वी नीलांजना श्री जी का पूर्व पार्षद साक्षी पारख पर सदैव आशीर्वाद और लगाव रहा रामगंजमंडी में खरतरगच्छ युवा परिषद और खरतरगच्छ महिला परिषद के गठन के समय आचार्य श्री और बहिन महाराज विद्युतप्रभा श्रीजी ने साक्षी पारख को दोनों परिषद में रखा और जिम्मेदारियां दी नवकार मंत्र जाप के बाद श्री संघ की तरफ से शोक पत्र एवं सांत्वना पत्र लिखा जो श्री संघ के लोग पालीताना जाकर देगे।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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