तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज का वर्षा योग कलश स्थापना समारोह संपन्न इस बार का चातुर्मास पर्यावरण को समर्पित है महाराज श्री

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तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज का वर्षा योग कलश स्थापना समारोह संपन्न इस बार का चातुर्मास पर्यावरण को समर्पित है महाराज श्री
[ झालरापाटन।

सकल दिगंबर जैन समाज एवं शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पंचायत ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में आचार्य प्रज्ञा सागर मुनिराज ससंघ का गुरुदीक्षा व 36 वें पर्यावरण मंगल चातुर्मास के तहत रविवार को हरिश्चंद्र कृषि उपज मंडी प्रांगण में कलश स्थापना कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत श्रेष्टियों के दीप प्रज्वलन एवं महिला मंडल के मंगलाचरण के साथ हुई। मंडी व्यापारियों एवं समाज के युवाओं ने गुरु मेरी पूजा गुरु भगवंत गीत से तालियों की गड़गड़ाहट के साथ गुरु भक्ति की। दिगंबर जैन समाज की महिलाओं के आकर्षक नृत्य के साथ आचार्य के चातुर्मास कलश की स्थापना की। दिगंबर जैन युवा मंडल सदस्यों ने धरती को हरा भरा बनाए रखने के लिए चांदी से बनाया हुआ वृक्ष आचार्य को भेंट किया।

 

तपोभूमि उज्जैन के गुरु गौतम स्वामी गुरुकुल के नन्हे बच्चों ने अर्चना सिंगई के निर्देशन मेंवृक्ष का आकार बनाकर पर्यावरण एवं पेड़ पौधों को बचाने का संदेश देते हुए नाटिका प्रस्तुत की। जिसे देखकर मौजूद सभी लोगों ने इसकी सराहना की। श्वेतांबर जैन समाज के लोगों ने इस वर्ष दिगंबर व श्वेतांबर जैन समाज के लोगों द्वारा 18 दिवसीय पर्यूषण पर्व व सामूहिक रूप से क्षमावाणी

 

 

कार्यक्रम मनाए जाने को लेकर आचार्य को श्रीफल भेंट किया।

प्रज्ञा कला मंच उज्जैन की महिला ने णमोकार मंत्र पर बहुत ही आकर्षक प्रस्तुति दी। उज्जैन दिगंबर जैन आदिनाथ ग्रुप, चाकसू, गुजरात भरूच, बडौदा, अहमदाबाद, महाराष्ट्र औरंगाबाद, गाजियाबाद सहित विभिन्न स्थानों से आए समाज के लोगों और खाद्य एवं तिलहन व्यापार संघ पदाधिकारीयों ने आचार्य को श्रीफल भेंट किया। नन्हे बालक अनार्यवीर हूमड़ ने पर्यावरण पर बहुत ही शानदार प्रस्तुतिदी।

जानकारी देते हुए श्री नलिन लुहाड़िया ने बताया कि मुख्य कलश लेने का सौभाग्य गाजियाबाद निवासी नवीन जैन को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर कविम जैन ने आचार्य का जीवन परिचय दिया। संचालन यशोवर्धन बाकलीवाल ने किया।

अपने मंगल प्रवचन में आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने कहा कि आज नगर में चातुर्मास की स्थापना हो गई है, लगभग पांच माह तक संत आपके नगर में धर्म आराधना करेंगे। वर्षा काल में दिगंबर संत एक ही स्थान पर चातुर्मास करके धर्म का प्रचार प्रसार करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका इस बार का चातुर्मास पर्यावरण को समर्पित है। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमसे बहुत नाराज है। हमारे पास प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध है लेकिन वह नियत स्थान और नियत समय के लिए ही होते हैं। हमें अपना जीवन चलाने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है जो हमें प्रकृति से ही मिलती है। चातुर्मास के दौरान वह इस क्षेत्र में सभी के सहयोग से अधिक से अधिक पौधे लगवा कर इन्हें संरक्षित करवाने के लिए लगातार अभियान चलाएंगे और अधिक से अधिक पौधारोपण करवा कर क्षेत्र को हरा-भरा बनाएंगे। उन्होंने कहा कि चातुर्मास के बाद वह जब भी यहां आएंगे तो उन्हें सब तरफ घनघोर जंगल दिखाई देना चाहिए तभी उनके इस अभियान की सार्थकता होगी।

 

आचार्य ने कहा कि चातुर्मास धर्म और आराधना के लिए रहता है इसलिए हमें अपने दैनिक जीवन में से धर्म ध्यान और आराधना के लिए नियमित रूप से समय निकालना है।
[ इससे पूर्व शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सुबह 5:30 बजे गुरु भक्ति, भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक, मंत्रोच्चार के साथ गुरुदेव द्वारा आशीर्वाद व ध्यान, समस्त भक्तों का गुरुदेव द्वारा तिलक और दीप प्रज्वलन किया गया। शांतिनाथ बाड़ा मे गौतम स्वामी, शांति सागर महाराज, पुष्पदंत सागर महाराज के चरणों की स्थापना की गई। आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज का पिच्छिका परिवर्तन हुआ। जिसमें आचार्य ने अपनी पिछली पिच्छी गुरु भक्त चाकसू निवासी संदीप बजाज परिवार को भेंट की। आचार्य का पाद प्रक्षालन किया गया और उन्हें शास्त्र भेंट किए गए। 136 जोड़ों को फलदार वृक्ष देकर पूजन करवा कर इन्हें अपने आंगन में लगवाने का संकल्प दिलाया। आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज की अष्ट द्रव्य से पूजा और आरती की गई। गुरुवर पूजा रचाएंगे, मेरी झोपड़ी के भाग खुल जाएंगे गुरुवार आएंगे, आई शुभ घड़ी गुरुवर पधारे स्वागत गीत पर मधुर स्वर लहरियों वआचार्य के जयकारे के साथ महिला मंडल की महिलाएं और पुरुषो ने आचार्य के समक्ष नृत्य के माध्यम से तालियो की गडगडाहड़ के बीच आचार्य के आगमन का स्वागत करते हुए चातुर्मास करने के लिए मनुहार की। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से आचार्य के सानिध्य में मंगल कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें बैंड बाजों के साथ तीन बग्गिया, समाज के पुरुष एवं महिलाएं तीन चरण कलश के साथ चल रहे थे। महिला बैंड के साथ महिलाएं एवं युवतिया नृत्य करती हुई चल रही थी।

यह रहे पुण्याजक

। तीन मंगल कलश के पुण्यार्जक नाथूलाल कमल कुमार शुभम कुमार पाटौदी परिवार, गुजरात भरूच के चंद्रेश भाई नवनीत लाल जैन, रखबचंद कासलीवाल परिवार, पाद प्रक्षालन का सौभाग्य गुजरात बड़ौदा के मदन भाई कंचन बाई हुमड परिवार, शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य निवाई निवासी लालचंद जैन को प्राप्त हुआ
दूर-दूर से आए लोग।

कार्यक्रम में झालरापाटन व झालावाड़ के अलावा कोटा, बारां, बूंदी, टौंक, निवाई, चाकसू,जयपुर, कड़ोदिया, भवानी मंडी, रामगंज मंडी, खानपुर, रटलाई,पिडावा, सुसनेर, उज्जैन, इंदौर, भरूच, बडौदा, अहमदाबाद तक के लोग आए।

तंबाकू और अन्य नशा नहीं करने की शपथ दिलाई।

कार्यक्रम के दौरान आचार्य ने समाज के सभी लोगों को विशेष कर युवा पीढ़ी को तंबाकू व अन्य किसी भी प्रकार का व्यसन नहीं करने की शपथ दिलाई।
नलिन लुहाड़िया से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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