प्राप्त को पर्याप्त मान लोगे तो राग द्वेष से बच जाओगे प्रमाण सागर महाराज
इंदौर
सारा संसार कर्म की मुट्ठी में है”तुम्हारी मुटठी में कुछ भी नहीं””जीवन” क्या है? पानी की बूंद के समान, उसके लिये इतना अधिक तामझाम क्यों?जब एक श्वांस पर भी तुम्हारा अधिकार नहीं,सुख दुःख,संयोग वियोग,मानअपमान,अनुकूल-प्रतिकूल संयोग सभी कर्माधीन है,तो उसे स्वीकार करो, कर्म की इस व्यवस्था को समझ जाओगे तो आपका सारा दुःख और प्रलाप मिट जाएगा तथा “समता”आ जाएगी।
उपरोक्त उदगार मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने छत्रपति नगर इंदौर में आयोजित धर्म सभा में व्यक्त किये।
मुनि श्री ने कहा कि जब बुरा बक्त आये तो प्रयास करो उससे ज्यादा जूझो मत जैसे समय की धार से जूझने वाला तिनका क्षत विक्षत किनारे फिक जाता है जबकि समय की धारा के साथ जो तिनका आगे बढ़ता है वह अपने लक्ष्य को पाकर समुद्र में मिल जाता है।
मुनि श्री ने कहा कि आज हर व्यक्ति अपने जीवन व्यवस्था से संतुष्ट नजर नहीं आता,उसकी दृष्टि हमेशा दूसरों की ओर रहती है उसके पास इतना क्यों? मेरे पास क्यों नहीं? राग द्वेष करने से कुछ नहीं मिलता वह चित्त को और वैचैन करता है,संत कहते है कि “प्राप्त को यदि पर्याप्त मान लोगे तो राग द्वैष से बच जाओगे
। मुनि श्री ने कहा आप लोग “मेरीभावना” में पड़ते है “होकर सुख में मग्न न फूले, दुःख में कभी न घबराये,पर्वतनदी-श्मशान-भयानक,अटवी में नहिं भय खाये” इन्ही दोनों लाईन में संपूर्ण आध्यात्म का रहस्य छिपा हुआ है, मुनि श्री ने समझ- स्वीकार- श्रद्धान और समता पर चर्चा करते हुये कहा कि “समझ” जब आध्यात्मिकता के साथ आती है,तो “श्रद्धान” पक्का होता है, जब श्रद्धान को मन से स्वीकार कर लोगे तो आपके अंदर स्वतः समता आ जाएगी।तथा पर पदार्थों के प्रति ममत्व भाव समाप्त हो जाएगा उन्होंने कहा कि कर्म के सिस्टम को समझो जो कर्म की व्यवस्था को समझ लेता है,वह कभी दुःखी नहीं रहता।
मुनि श्री ने एक घटना सुनाते हुये कहा कि एक युवक की शादी अधर्मी और शकीली युवती से हो गयी बात बात पर वह अपने पति से लड़ती और शक करती थी लोगों ने कहा कि उससे डिवोर्स ले लो लेकिन युवक समझदार तथा हम लोगों से जुड़ा हुआ था आध्यात्म को समझता था उसने सोचा कि यदि इसे में छोड़ दूंगा तो यह और पागल हो जाएगी उसने कर्मजन्य संयोग मानकर उसे निभाया और समय आने पर वह ठीक हुई और आज वह परिवार सुखी है।दूसरी घटना में मेरे संपर्क में एक और व्यक्ति है जिसका आज भी करोड़ों का कारोबार है एक बार उसे व्यापार में 85 लाख का नुकसान हुआ उसने उस नुकसान की परवाह न कर 15 लाख रुपये की बोली लेकर दान और कर दिया लोगों ने उससे कहा कि अभी अभी तो तुम्हारा नुकसान हुआ है तो उसने कहा कि यह नुकसान पिच्यासी लाख का हुआ करोड़ का भी हो सकता था आज नुकसान हुआ है तो कल नफा भी हो सकता है,उसकी यह दृष्टि आध्यात्म की दृष्टि थी समय आया और वह आज संपन्नता की ऊंचाइयों पर है।
तीसरा शास्त्रोक्त उदाहरण “अंजना” का दिया जिसमें कर्म ने उसे ससुराल और मायके दोंनों ने स्वीकार न कर गर्भस्थ स्थिति में वियावान जंगल में पहुंचा दिया लेकिन उसने कर्म की उस व्यवस्था को स्वीकार कर अपनी समझ सेअसाधारण कार्य किया और प्रतिकूल परिस्थितियों में नौ माह तक उस वियावान जंगल में निकाले और कामदेव पुत्र को जन्म दिया। मुनि श्री ने कहा कि तत्व के प्रति पक्का श्रद्धान होगा और संसार की विचित्रता को

समझोगे तो प्रतिकूल संयोग में भी कोई आपको आपकी श्रद्धा से डिगा नहीं पाएगा और यदि श्रद्धान आपका कमजोर होगा तो आप टोना टोटका तथा अंधविश्वास के शिकार होकर इधर उधर भटक जाओगे।
प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया 14 दिसंबर शनिवार को प्रातः7:30 से 8:45 तक “भावनायोग” होगा एवं 15 दिसंबर रविवार को मुनिसंघ सानिध्य में रेवतीरेंज में सहस्त्रकूट जिनालय के भूमीपूजन एवं शिलान्यास समारोह होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
