नारी महान है वह महापुरुषों की जननी है प्रसन्न सागर महाराज
सिवनी
अपने मंगल प्रवचन में अंतरमना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि मंज़िल पर जिन्हें जाना है, वे शिकवे नहीं करते.शिकवे में जो उलझे हैं, वे पहुँचा नहीं करते..!
*नारी महान है। वह महापुरूषों की जननी है।*
नारी की प्रगति के बिना परिवार की प्रगति नहीं है। परिवार का आधार नारी है। इसलिए नारी की कोख मानवता की जन्म भूमि है। भारतीय संस्कृति में नारी को सदा सम्मान मिला है। तीर्थंकर की माता होने का गौरव भी नारी को ही मिला है।
उन्होंने कहा कि एक नारी के लिये, एक आर्दश माँ बनना तभी
सम्भव है जब उसमें पृथ्वी जैसी सहिष्णुता, समुद्र जैसी गम्भीरता,


हिम सी शीतलता, गंगा के समान पवित्रता, वीणा जैसी मधुरता, हिमालय जैसी उच्चता और आसमान जैसी विशालता हो। अन्यथा सौम्य गुणों के अभाव में नारी का नारीत्व अधूरा है…!!!। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
