80साल के डॉक्टर कल्याण गंगवाल पहुंचे नेपाल बिहार बॉर्डर रक्सौल पहुंचे गढ़ीमाई उत्सव में पशु बलि रोकने के लिए

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80साल के डॉक्टर कल्याण गंगवाल पहुंचे नेपाल बिहार बॉर्डर रक्सौल पहुंचे गढ़ीमाई उत्सव में पशु बलि रोकने के लिए
नेपाल बिहार बॉर्डर रक्सौल
शाकाहार के प्रचार प्रसार में अग्रणीय डॉ कल्याण गंगवाल पुणे गुरुवार को नेपाल बिहार बॉर्डर पर स्थित रक्सौल में पहुंचे। जहां से नेपाल में स्थित गढ़ीमाई देवी पर जाया जाता है। आपको बता दे गढ़ीमाई देवी के यहां हर 5 साल में लाखों पशुओं की हत्या होती है, बली दी जाती है। जिसमें बकरियां, मुर्गियां, भेसे सभी प्राणी होते है।

 

मुक प्राणियों के प्रति कड़ी चिंता व्यक्त करते हुए डॉक्टर गंगवाल बताते हैं कि करीब 5 साल पहले करीबन 350000 पशुओं की हत्या तीन-चार दिनों में हुई थी। इस वर्ष यहां पर यह यात्रा 8 9 10 दिसंबर को होने जा रही है जिसमें काफी संख्या मुक प्राणियों की कत्ल होने वाली है।

डॉक्टर गंगवाल बताते हैं कि इसे बचाने के लिए मैंने कोशिश की है पिछले 40 साल में महाराष्ट्र में हमने पशु बली रूकवाई है करीबन 300 जगह पर पशुबली बंद हो चुकी है। अनेकों स्थान के नाम बताते हुए उन्होंने कहा कि पशुहत्या काफी हद तक कम हो चुकी है।
और मैं अब यहां पर भी पशु बली रोकने के लिए नेपाल बिहार बॉर्डर पर रक्सौल पहुंचा हूं जहां पर जगह-जगह से जीव दया के कार्यकर्ता आए हैं कोई पटना से है कोई बेंगलुरु से हैं यह सब मिलकर काम कर रहे है, बेंगलुरु से आए स्वामी दयानंद महाराज जो प्राणी विश्व कल्याण बोर्ड से जुड़े हुए हैं वह बहुत ही मेहनत करके प्राणियों के रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं। जो जो प्राणी हम बचा लेते हैं यहां पुलिस के हवाले कर देते हैं उसका संरक्षण करने की जिम्मेदारी बिहार सरकार ने ले ली है।

उन्होंने बिहार सरकार का धन्यवाद देते हुए कहा कि हमें खुशी है कि बिहार सरकार ने बहुत अच्छा सहयोग किया है। और पिछले 15 दिन से पूरे संपर्क में था एवं यहां पर पूरी नजरे बनाए हुए था। और कोशिश कर रहा था कि दिल्ली से या पटना से बड़े-बड़े अधिकारी हमारी मदद कर पाए और उन्होंने मदद बहुत अच्छे तरीके से की है पटना के पद्मश्री श्री विमल जैन ने भी इसमें बहुत अच्छा सहयोग दिया है। आज उसका फल हमें दिख रहा है। इसके साथ ही हैदराबाद से आए जीव दया प्रेमी श्री शांतिलाल जैन का भी विशेष सहयोग मिल रहा है।

उनका कहना है कि यह प्राणी बच जाएंगे तो अहिंसा के लिए बहुत बड़ा काम होगा। कड़ी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यह हिंसाचार धरती का सबसे बड़ा हिंसाचार है। ऐसे प्राणियों की हिंसा देवियों के स्थान पर कहीं पर भी नहीं होती है। यह कार्य हम पुलिस प्रशासन की मदद से एवं धमकी देकर और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद लेकर सभी को समझा कर रहे है। मार्ग अहिंसक है पुलिस वालों के डर से कई लोगों ने पशु बली रोक दी है। और अपने पशु घर ले जा रहे हैं। यह बहुत बड़ी आनंद की बात है। हम गढ़ीमाई जाकर वहा के अधिकारियों से एवं वहा के ट्रस्टियों एवम पुजारीयो के साथ बात करके उन्हें समझाएंगे, और उनका मन बदलने की कोशिश करेंगे। यहां की देवी की मान्यता है कि यहां पर मन्नत मांगने से सत्ता की प्राप्ति होती है। और हजारों राजनीतिक लोग यहां पर आते हैं और पता चला है कि क्योंकि यह बली हर 5 साल में होती है। पिछले 5 साल पहले करीबन 300 से 400 राजनीतिक से जुड़े व्यक्ति यहां पशु बली देने आए थे। प्रभु से हम यही प्रार्थना करते हैं कि यह पशु बली प्रथा बंद हो और सभी की शुभकामनाएं हमारे साथ है।
अपील
हम पंचकल्याणक महोत्सव में बहुत खर्चा करते हैं लेकिन हमें जीव दया एवं परोपकार के क्षेत्र में एवं मूक पशुओं की विषय में भी सोचना चाहिए और इसके लिए जागृत होना चाहिए।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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