उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा आचार्य श्री सुनील सागर महाराज के दर्शन करते हुए जैन संतों की साधना को कठिन बताया। अंतरमन में करुणा की धारा प्रभावित नहीं हुई वह मानव नही पशु है सुनील सागर महाराज

धर्म

उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा आचार्य श्री सुनील सागर महाराज के दर्शन करते हुए जैन संतों की साधना को कठिन बताया। अंतरमन में करुणा की धारा प्रभावित नहीं हुई वह मानव नही पशु है सुनील सागर महाराज
किशनगढ़
परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनील सागर महाराज सानिध्य में ग्रीष्मकालीन वाचना चल रही है एवं धर्म की प्रभावना हो रही है। शुक्रवार की बेला में राजस्थान सरकार के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बेरवा पूज्य गुरुदेव के दर्शन करने हेतु पधारे उनके साथ सांसद भागीरथ चौधरी भी पहुंचे। एवं डॉ विकास चौधरी विधायक ने भी मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

 

मंगल आशीर्वाद के समय अपने उद्बोधन में श्री बैरवा ने जैन संतों की साधना को कठिन बताया और कहा कि उनके द्वारा ही अहिंसा शांति का संदेश हमें मिलता है। इन दोनों ने आचार्य श्री से देशहित, ब्राह्मी लिपि, हिंदी भाषा के विषय में पूज्य गुरुदेव से चर्चा की। आचार्य श्री ने इन्हें जिनवाणी भी प्रदान की इस अवसर पर समाज की ओर से दोनों का अभिनंदन भी किया गया।

पूज्य आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में करुणा के विषय में प्रकाश डाला और कहा कि जिस मानव के जीवन में करुणा नहीं है वह इंसान पशु है। महाराज श्री ने आगे कहा कि मानवता की मूल शक्ति का स्रोत अनुकंपा है। मानव सामाजिक प्राणी एवं समाज का अस्तित्व है। परस्पर सहयोग का आधार, मानव हृदय की कोमलता, अर्थात परस्पर सुख-दुख में सहज संवेदना। उसी अनुभूति का दूसरा नाम करुणा है। जिसके अंतर्मन में करुणा की धारा प्रभावित नहीं हुई है, वह मानव नहीं है पशु है।

 

 

 

 

 

मार्मिक उद्बोधन देते हुए पूज्य गुरुदेव ने कहा कि दुर्भाग्यवश हृदय में करुणा का शीतल झरना सूख गया है। उसकी जगह वहा एक भयंकर तृप्त मरुस्थल ने ली है। पारंपरिक तूफान की आंधियां चल रही है।

 

 

 

इसके परिणाम स्वरुप हत्या, लूटमार, दुराचार, भ्रष्टाचार का रावण राज्य स्थापित हो गया है। जिसमें मानव जाति के सर्वनाश का भय उत्पन्न हो गया है। अब धरती पर सुख शांति का जीवन करुणा ही उतार सकती है। करुणा नहीं तो धरती नर्क है, मानवता को जागृत रखना है तो भगवती करुणा का आश्रय लेना पड़ेगा। दुखी हृदय के धूल उड़ाते मरुस्थल में पुनः दया का परम अमृत झरना बहाना पड़ेगा। आत्मवत सर्व भूतेषु का नारा हमे कथनी के द्वारा नही करनी के द्वारा गुंजायमान करना होगा।

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी9929747312

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