क्षुल्लिका संदेशमति माताजी की देह पंचतत्व में विलीन आचार्य श्री सुनील सागर महाराज ने अपनी विनयांजलि दी
खमेरा
आचार्य श्री 108 सन्मति सागर जी महाराज की हृदयस्थली खमेरा मे अंकलीकर परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज विराजमान है उन्हीं के सानिध्य में सिद्ध चक्र महामंडल विधान भक्ति भाव के साथ हो रहा है।
महामंडल विधान के द्वितीय दिन गुरुवार की बेला में 20 वर्षों से आचार्य संघ में साथ रही क्षुल्लिका 105 संदेशमति माताजी का 10 निर्जल उपवास पूर्वक समाधि मरण हुआ।

उन्हें विनयाजली देते हुए आचार्य श्री सुनील सागर महाराज ने कहा कि काल के आगे किसी की नहीं चलती, जीवन का कब अंत हो जाए किसी को पता नहीं, यह मानव जीवन पर्याय मिला है, इसमें सत्कर्म करो और विकारों में अपने जीवन को बर्बाद मत होने दो, जिंदगी बड़ी चालाक होती है रोज नया कल देकर उम्र छीनती जाती है। जिसने इस राज को समझ लिया उसने अपने जीवन में संयम को स्वीकार कर लिया।
एक उदाहरण के माध्यम से महाराज जी ने बताया कि
जिस प्रकार युद्ध में जीतने के लिए तलवार की जरूरत होती है उसी प्रकार कर्मों से जीतने के लिए निर्मल भावों की जरूरत होती है, निर्मल भाव से कषाय और विकार कटते हैं, अकेले पैसे होने से व्यक्ति पुण्य आत्मा नहीं होता, जिसके जीवन में व्यसन नहीं है, घर के युवा और वृद्ध आपकी प्रेम के साथ रहते हैं, पैसों को व्यसन और फैशन में नहीं बल्कि प्रभु की भक्ति आराधना में लगाते हैं, ऐसे जीव पुण्य आत्मा है। धन मृत्यु के बाद कभी साथ में नहीं जाता, पुण्य कर्म और किया हुआ धर्म ही साथ जाता है। इसलिए देह और जीव की भिन्नता को जानकर सदा सत्कर्म करते रहें और अपने जीवन को मंगलमय बनाएं।
पूज्य माताजी की डोला यात्रा निकाली गई एवं विधि विधान के साथ उनकी अंतिम क्रिया की गई ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
