स्मृति का झरोखा 1 दिसंबर 2019 पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज विराट सागर महाराज का हुआ था आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से समागम

धर्म

स्मृति का झरोखा 1 दिसंबर 2019 पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज विराट सागर महाराज का हुआ था आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से समागम
आलोकिक समागम आचार्य श्री से मुनि प्रमाण सागर जी विराट सागर जी महाराज से भव्य मिलन
शिष्यो का गुरु के प्रति श्रद्धा का अलोकिक उदाहरण प्रस्तुत
नेमावर
1 दिसंबर 2019 का क्षण जब संपूर्ण विश्व की नजर जिस क्षेत्र पर थी वह थी नेमावर सिद्ध क्षेत्र मध्यान की वह बेला एक नया पर्याय बनकर हम सबके बीच परिलक्षित हो गयी थी।

 

जी हा जब प्रमाण विराट का अपने गुरु आचार्य श्री विधासागर जी से महामिलन हुआ हर एक उन दर्श्यो का साक्षी बनना चाहता हो वह द्रश्य अलोकिक था जब मुनि श्री प्रमाण सागर जी विराट सागर जी महाराज गुरुवर को नमोस्तु करते हुये चरण वंदना कर रहे थे और चरणों का पद प्रक्षालन कर रहे थे।

 

मानो वह कह रहे हो मेरे भगवन मेरे गुरु के दर्श आज हो गये हो शिष्यो का गुरु के प्रति अनुराग का भाव श्रद्धा का भाव परिलक्षित हुआ जो एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत हुआ है गुरुकुल की परंपरा भी ऐसी होती थी।

जब उन्होंने गुरु के समक्ष अपने भाव रखें तब उन्होंने कहा था आज में कुछ कहने की स्थिति मे नहीं बस यही कहुगा जय जय गुरुदेव प्रमाण सागर जी महाराज

उन्होने कहा आचार्य गुरुवर आपको दीक्षा लिये 52 वर्ष व्यतीत हो गये मोक्ष मार्ग पर चलते हुये आप जैन धर्म की एक एक पर्याय बन चुके है आज का यह पावन दिन मुझे 15 वर्ष 8 माह 22 दिन बाद मिला वही मुनि श्री विराट सागर जी महाराज को यह अवसर 9 वर्ष 8 माह 22 दिन बाद मिला उन्होने कहा गुरुवर तो साक्षात तीर्थंकर की प्रतिमूर्ति है उन्होने कहा गुरुवर की द्रष्टि आशीष जिस पर हो जाती है उन्होने कहा किसी एक सज्जन ने गुरुदेव से कहा की उंनके पाव मे छाले है और खून आ रहा है तो गुरुदेव ने कहा सब ठीक होगा आशीष दी मुनि श्री ने कहा खून तो आ रहा था पर दर्द गायब हो गया साथ ही उन्होने कहा गुरुदेव की संस्क्रती और मानवता पर विशेष क्रपा है मानवता और जन जन का कल्याण कर रहे है जब बार बार वह जय जय गुरुदेव का उच्चारण कर रहे थे सारा मंच जय जय गुरुदेव से गुंजायमान था।
सहयोग का मूल मंत्र अंतिम सांस तक बना रहे विराट सागर जी महाराज

मुनि श्री विराट सागर जी महाराज ने कहा था वह दिन वर्ष 2009 का जब आचार्य गुरूवर ने कहा था जब प्रमाण सागर जी के पास भेजा था तब कहा था की बड़े भाई का सहयोग करना यह मूलमंत्र प्रदान किया था यह सहयोग मैने बनाया रखा उन्होने कहा गुरुदेव यह आशीष दे की यह सहयोग की भावना अंतिम सास तक बनी रहे वही उन्होने एक मार्मिक गीत प्रस्तुत किया था जो मंत्रमुग्ध कर गया उन्होने कहा
गुरु की छाया मे शरण जो पा गया उसके जीवन मे सुमंगल आ गया
गुरु कृपा सबसे बड़ा उपहार है गुरु ही अपने देवता श्री भगवान है
हमको क्या उनको हमारा ध्यान है भव उद्धार है बेड़ा पार है गुरु की छाया मे शरण जो पा गया उसके जीवन मे सुमंगल आ गया
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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