दीक्षार्थी मेंना दीदी आर्यिका स्वाध्याय श्री माताजी व अंगूरी दीदी बनी क्षुल्लिका सामायिक श्री माताजी 
बांसवाडा
दीक्षार्थी बहिनों ने दीक्षा से पूर्व किया केशलोंच
आचार्य श्री 108 विभव सागर महाराज ने श्रमण परम्परा अनुसार दीक्षा दी व मेंना दीदी को नया नामकरण करते हुए आर्यिका 105स्वाध्याय श्री माताजी दिया। साथ ही अंगूरी दीदी को क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान करते हुए नया नामकरण क्षुल्लिका 105 सामायिक श्री माताजी दिया।
अब संघ में इन दो दीक्षा उपरान्त 29 पिच्छी का संघ हो गया है। दीक्षा से पूर्व दीक्षार्थी बहिनों के दीक्षा के संस्कार किए गए। आचार्य श्री द्वारा मस्तक पर श्रीकार का लेखन किया। व केशलोंच किया। इस आयोजन में संगीतकार द्वारा धार्मिक भक्ति गीत व केशलोंच के भक्तिमय आवाज से इस आयोजन को भक्तिमय व भाव विभोर बना दिया।
जीवन मे संयम महत्वपूर्ण है आचार्य श्री
इस अवसर पर आचार्य श्री विभव साग़र महाराज ने कहा उन्होंने दीक्षार्थी पर प्रकाश डालते हुए कहा गर्व है की ये जैन धर्म की पालना करते हुए त्याग तपस्या के मार्ग पर आगे बढे। जीवन मे संयम महत्वपूर्ण है, जो जीवन की दशा और दिशा दोनो को बदल देता है। उन्होनें एक सारभूत बात कही कहा जीवन में लेना है तो जैनेश्वरी दीक्षा लेना, देना है तो दान दे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
