जहां नारी का अपमान, वहां शुभता नहीं : प्रमाण सागर सागर महाराज पंचकल्याणक महोत्सव… गर्भ कल्याणक की क्रियाएं संपन्न
| रांची
गर्भ कल्याणक का संदेश मनुष्य को इस बात की याद दिलाता है कि हर आत्मा में अनंत शक्ति है। उसे जागृत करने की जरूरत है। महाराज ने प्रतिष्ठा विधान को पाषाण से परमात्मा बनाने वाला पावन अनुष्ठान बताया और कहा कि लाखों मित्रों के प्रभाव से भगवान की प्रतिमा में दिव्य गुणों का आरोहण किया जाता है।
धार्मिक संस्कारों से प्रतिष्ठित मूर्ति में अतिशय उत्पन्न होता है और भक्तों के लिए पूज्य बनाता है। महाराज श्री ने भ्रूण हत्या जैसे अपराध पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उसके परिणामों की उदाहरण के साथ व्याख्या की। कन्या भ्रूण हत्या को आधुनिक समाज का सबसे बड़ा पाप बताते हुए कहा कि कन्या केवल शरीर नहीं संस्कार और संस्कारक है। जिस समाज में कन्या सुरक्षित नहीं, वह कभी समृद्ध नहीं हो सकता। जहां नारी का अपमान होता है, वहां शुभता कभी नहीं ठहरती।

उन्होंने मौजूद श्रद्धालुओं को संकल्प दिलाया कि हर परिवार समाज और संस्था को प्रण लेना है कि गर्भ में पल रहे किसी भी जीवन पर अन्याय नहीं होने देंगे।बिरसा मुंडा फन पार्क में श्री दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित महोत्सव में गुरुवार को जैन मुनि प्रमाण सागर महाराज के सानिध्य में भगवान की प्रतिमाओं का अभिषेक किया गया।
गर्भ कल्याणक की अलौकिक क्रियाएं एवम 16 स्वप्न की संजीव क्रियाएं प्रस्तुत की गई। मंगलाष्टक अभिषेक शांतिधारा, नित्य पूजन और धर्म कल्याणक पूजन हवन हुआ। दोपहर में सीमंतिणी क्रियाएं
माता की गोद भराई के अनुष्ठान हुए। आयोजन स्थल पर बनाए गए भव्य पंडाल के एक अस्थाई निवास कक्ष में माता-पिता विमल सोगानी और सरिता सोगानी के निवास स्थल पर पहुंचकर 5000 से अधिक जैन धर्म की महिलाओं और पुरुषों ने नित्य नियम की पूजा के बाद गोद भराई की गई।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
