मुनि श्री चंद्रप्रभ सागर जी को क्यों मिला आचार्य श्री की सेवा का अवसर..?? बताया मुनि श्री दुर्लभसागर जी ने..
है एक महान मनीषी जिनकी साधना तप संयम के कारण ज़न जन का कल्याण हो रहा है। कलयुग में सदयुग जैसी शिष्य मंडली को बनाया। गुरुकल बनाकर एक आयाम दिया ऐसे महामना मनीषी है आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जो रहली अतिशय क्षेत्र में विराजित है। वह अस्वथ्य होने पर भी अपनी साधना पर अडिग है। उनकी सेवा का अवसर उन्ही के परम शिष्य मुनि श्री चद्रप्रभ साग़र महाराज को मिला मुनि श्री चंद्रप्रभ सागर जी को क्यों मिला आचार्य श्री की सेवा का अवसर..?? बताया मुनि श्री दुर्लभसागर जी ने..उन्होंने कहा जबसे मुनि श्री चद्रप्रभ साग़र महाराज ने मुनि दीक्षा ली तबसे आज तक एक आहार एक उपवास की साधना कर रहे है। वह 3 बार सिंहनिष्कंडित व्रत भी कर चुके है। पूज्य मुनि श्री ने कहा अगर तप त्याग की होड़ हो तो उनके जैसा तप बिरला ही कर पाता है। उनकी साधना तप गुरु चरणों के प्रति समर्पित होने के कारण ही उन्हे गुरु चरणों के समीप रहने का व सेवा का यह अवसर मिला।
मुनि श्री दुर्लभ साग़र महाराज ने आज गुरु चरणों की स्म्रति आयी तब यह भाव मन में आए गुरु चरणों की स्मृति से मेरी आँखें नम हो गयी।
हम राजस्थान वासी अपने को पुण्यशाली मानते है कि हमे ऐसे सन्त का समागम व सानिध्य मिला विशेषकर रामगंजमंडी, भवानीमंडी, कोटा, पिड़ावा आदि
अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
