निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी महाराज ससंघ का सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर से हरदा की ओर चातुर्मास उपरांत हुआ मंगल विहार
नेमावर
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के धर्मप्रभावक शिष्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री वीरसागर जी महाराज ससंघ का सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर से हरदा की ओर चातुर्मास उपरांत सोमवार को पद विहार हुआ। मुनिश्री ने नेमावर में करीब 4 माह तक जैनधर्म की प्रभावना की। मुनिसंघ संध्याकाल तक हरदा जिले के अबगांव पहुंच चुका है। मंगलवार को हरदा में मुनिसंघ की मंगल आगवानी होगी।
ट्रस्ट कमेटी के कार्याध्यक्ष सुरेश काला, महामंत्री सुरेंद्र जैन ने बताया कि पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से अभिसंचित इस क्षेत्र में यह चातुर्मास स्वर्णिम इतिहास में दर्ज होगा। इस चातुर्मास की उपलब्धियां अपने आप में अभूतपूर्व हैं। इसमें ‘प्रैक्टिकल धर्म’ के प्रत्येक स्वरूप को सांगोपांग साकार करने का प्रयास मुनिश्री द्वारा किया गया।







मीडिया प्रभारी पुनीत जैन ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान निर्यापक श्रमण मुनि 108 श्री वीरसागर जी महाराज के सानिध्य में अद्भुत-अपूर्व शिविर का आयोजन हुआ। इस चातुर्मास में उत्कृष्ट सिद्ध साधना के फलस्वरूप कई समाधियां सम्पन्न हुईं जिनके माध्यम से जहां मोक्षमार्गियों का मार्ग प्रशस्त हुआ, तो वहीं प्रत्येक रविवार एक नए सेमिनार/ वर्कशॉप के माध्यम से परिवार व समाज के प्रत्येक पहलू को महाराज जी ने अपनी दिव्य ज्ञान ज्योति से आलोकित किया। नन्हे मुन्ने बच्चे महाराजश्री के कर कमलों से संस्कारित हुए, युवाओं ने जीवन की महत्वपूर्ण समस्याओं पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। समाज में बढ़ते अपराधों व विसंगतियों पर भी महाराजश्री की दृष्टि रही और इसीलिए प्रशासनिक अधिकारियों की वृहद वर्कशॉप का
आयोजन भी यहां किया गया। चाहे बात सास बहू के संबंधों की हो या पति पत्नी के रिश्ते की, परिवार और समाज के प्रत्येक समस्याग्रस्त पक्ष को महाराज श्री ने अपनी अद्भुत क्षमता और ज्ञान से समाधान की राह दिखाई। कुछ समय पूर्व ही संपन्न हुआ ब्रह्मचारियों का अभूतपूर्व सम्मेलन तो देशभर में खासा चर्चित तो रहा ही, साथ ही यह त्यागीवृत्तियों को जीने की नई राह दिखाने वाला भी सिद्ध हुआ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
