दुश्मन के सामने जाना है तो दार्शनिक बनकर जाओ और आत्मा में लीन होना है तो धर्मात्मा बनाकर आओ सुधा सागर महाराज
सागर
भाग्योदय तीर्थ में विराजित निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 सुधा सागर महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा कि दुश्मन के सामने जाना है तो दार्शनिक बनकर जाओ और आत्मा में लीन होना है तो धर्मात्मा बनाकर आओ दार्शनिक बनकर जाप मत करना, पूजा मत करना, मुनि मत बनना, धर्मात्मा बनाकर फेरना आनंद आएगा। दुश्मन के कुतर्क के सामने दार्शनिक बनना है।
महाराज श्री ने कहा कि जब मन तुम्हारा बिगड़ जाए तब दार्शनिक बनना है। जब मन तुम्हारा समझ में ना आए तब दार्शनिक बनना है। बालक को धर्म से नहीं दर्शन से समझा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि साधन में साध्य का ज्ञान होना चाहिए इसको बोलते हैं दर्शन, एक उदाहरण के माध्यम से महाराज श्री ने समझाया कि जैसे गेहूं में रोटी का ज्ञान होना चाहिए। हम भगवान की मूर्ति को देख रहे हैं और अनुभव हो रहा है यही साक्षात भगवान है। साधन में साध्य की तरफहै यही है भविष्यता। जब-जब हमें साधन में साध्य का ज्ञान हो जाए, समझ लेना तुम सफल हो गए। हम जीव को बचा रहे हैं लेकिन ज्ञान हो रहा है हमारे लिए धर्म का। भगवान की पूजा कर रहा है और अनुभव में आ रहा है मैं पूज्य बन रहा हूं।

परम पूज्य मुनि श्री के सानिध्य में समयसार की धार्मिक कक्षाएं भाग्योदय तीर्थ में चल रही है। देशभर से आए धर्म अनुरागी भैया एवं बहनो ने इसका ज्ञान अर्जित किया है और मुनि श्री के समक्ष गाथाओं को सुनाया साथ ही शंका समाधान कार्यक्रम में अपनी शंकाओं को रखा जिसका समाधान मुनि श्री द्वारा किया गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
