बारिश की बूंदे भले ही छोटी होलेकिन उनका लगातार बरसना बड़ी नदियों का बहाव बन जाता है..!अन्तर्मना आचार्य प्रसन्नसागरजी महाराज
कुलचाराम हैदराबाद
अन्तर्मना आचार्य प्रसन्नसागरजी महाराज ने अपनी पियूष वाणी में कहा किबारिश की बूंदे भले ही छोटी हो,लेकिन उनका लगातार बरसना बड़ी नदियों का बहाव बन जाता है..!
इस कथन के द्वारा महाराज श्री ने समझाया कि उसी प्रकार हमारे छोटे छोटे नियम, त्याग, संकल्प निश्चित ज़िन्दगी में बड़ा परिवर्तन ला देते हैं, बशर्त है कि भावनात्मक होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी ध्यान आकर्षित किया कि नकलची बन्दर नहीं बनना चाहिए। नकलची बन्दर में क्रिया तो होती है पर भावनात्मक नहीं, प्रदर्शनात्मक। इसलिए —
धर्म ढोंग नहीं – ढंग से करने की बात करता है। धर्म परिभाषा नहीं – प्रयोग है।
धर्म संगठन नहीं – साधना है।

उन्होंने धर्म को संगठन की उपमा नहीं देते हुए धर्म को साधना कहा और कहा कि जहाँ सम्प्रदाय, पंथ, हटाग्रह, दुराग्रह या अवसरवादिता है, वहाँ धर्म का प्रकाश हो ही नहीं सकता। ये सब तोड़ने का काम करते हैं। धर्म जीवन की बुनियाद है।
उन्होंने कहा की धर्म के अभाव में आदमी आदमखोर बन जाता है, और धर्म के सदभाव से, प्रभाव सेआदमखोर भी आदिनाथ और महावीर बन जाता है…!!!।
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
