गुरुधाम तीर्थ का शिलान्यास आचार्य श्री प्रज्ञासागर महाराज सानिध्य में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया गुरुदेव की कृपा से फाटाखेड़ा में बन रहा यह आध्यात्मिक परिसर आने वाली पीढ़ियों के लिए साधना, संयम और सेवा का केंद्र बनेगा। ओम बिरला
कोटा
कोटा के फाटाखेड़ा (मंडाना) में आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी महाराज के सान्निध्य में ‘गुरुधाम’ तीर्थ का शिलान्यास समारोह आयोजित हुआ जो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कर कमलों से हुआ।
श्री बिरला ने कहा कि गुरुदेव की कृपा से फाटाखेड़ा में बन रहा यह आध्यात्मिक परिसर आने वाली पीढ़ियों के लिए साधना, संयम और सेवा का केंद्र बनेगा। हाड़ौती की इस पुण्यभूमि पर तैयार हो रहा गुरुधाम धर्म और मानवता के आदर्शों का शांत और सरल प्रतीक होगा। जिनालय, संतशाला, वृद्धाश्रम, औषधालय, भोजनशाला और विश्रामगृह जैसी व्यवस्थाओं का यह क्षेत्र का महत्वपूर्ण जैन तीर्थस्थान बनेगा।

श्री बिरला ने कहा कि गुरुदेव प्रज्ञासागर जी की प्रेरणा हमें अहिंसा, क्षमा, संयम और सत्य जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने की राह दिखाती है। भगवान महावीर स्वामी के संदेश आज भी सभी के लिए मार्गदर्शक हैं। साधु-संतों का आगमन किसी भी भूमि को पवित्र बनाता है, और विश्वास है कि गुरुधाम तप, ज्ञान और सेवा का स्थायी केंद्र बनेगा। मेरी प्रार्थना है कि यह धाम हाड़ौती और समाज के लिए शांति और प्रेरणा का स्रोत बने। 
तपोभूमि प्रणेता परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रज्ञासागर जी महामुनिराज ससंघ के पावन सान्निध्य में फाटाखेड़ा स्थित कोटा के प्रथम जैन तीर्थ ‘गुरूधाम तीर्थ’ का भव्य शिलान्यास एवं विशाल पिच्छीका परिवर्तन समारोह अत्यंत श्रद्धा व गरिमा के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 8.30 बजे शांतिधारा, अभिषेक एवं मंगलाचारण से हुआ।
समारोह में मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला रहे, जबकि मुख्य शिलान्यासकर्ता के रूप में कमला देवी जैन, लोकेश–डॉ. दीप्ति जैन, चित्रेश–शेफाली जैन, खुशी, प्रेरक, देवांशी सहित सीसवाली सोनी परिवार ने पूजन व शिलान्यास प्रक्रिया पूर्ण की।


इस अवसर पर आचार्य प्रज्ञासागर जी महाराज ने बताया कि गुरूधाम तीर्थ में मूलनायक पद्मासन मुद्रा में विराजमान भगवान अजितनाथ जैन धर्म के द्वितीय तीर्थंकर—की प्रतिष्ठा होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा नगरी कोटा में भगवान महावीर के परम् शिष्य गुरू गौतम स्वामी की विशाल मूर्ति गुरूधाम तीर्थ की शोभा बढ़ाएगी।
पिच्छिका परिवर्तन हुआ जैन मुनि जीव रक्षा के लिए करते हैं पिच्छी का उपयोग प्रज्ञा सागर महाराज
इसी बेला में आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज संघ का पिच्छिका परिवर्तन समारोह हुआ आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने बताया कि दिगंबरमुनिराज की पिच्छी’ उनके संयमका अनिवार्य उपकरण है, जिसकेबिना वे एक कदम भी नहीं चलसकते। यह मयूर पंखों से बनी होती है, क्योंकि इनमें पांच प्राकृतिकगुण होते हैं, अत्यंत कोमल, हल्की धूल व पसीना नपकड़ने वाली, सुकुमार अर्थात मृदुल होती है। मोर के पंख न प्राकृतिक रूप से झड़ते हैं, जिससे अहिंसा का पालन होता है। पिच्छी का उपयोग जहां भी बैठते हैं, सोते हैं, पहले झाड़कर आसन ग्रहण करते हैं।इससे कोई सूक्ष्म जीव भी हो तो हट जाए। सूक्ष्म जीव रक्षा के लिए पिच्छी का उपयोग जैन मुनि करते हैं। मुनिराज साल में एक बार घिस जाने पर पिच्छी बदलते हैं। श्रावक यह संयम उपकरण भेंट करते हैं और मुनि आशीर्वाद स्वरूप अपनी पुरानी पिच्छी उसे देते हैं, जो संयम के क्षेत्र में आगे बढ़ने की भावना रखता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312








