संत पावर हाउस हैं इनसे धर्म के संस्कार रूपी ऊर्जा मिलती है।
गुलाबचंद कटारिया।पारसोला।हम भाग्यशाली हैं यह संत समागम हमें मिल रहा है आचार्य वर्धमान सागर जी अपने चर्या को कठोर रूप से वर्तमान में निभा रहे हैं । संत पावर हाउस है इनसे धर्म और संस्कार रूपी ऊर्जा हमें मिलती है ।मेरा पुण्य है जो मैं इस कार्यक्रम में आया हूं क्योंकि हरियाणा में पंजाब सरकार का गठन होना था किंतु यह एक चमत्कार है कि जो शपथ विधि अभी होनी थी वह तिथि बदलकर 17 अक्टूबर हो गई और मुझे आचार्य संघ में उपस्थित होने का ओर आशीर्वाद लेने काअवसर मिला है। कठोर तपस्या से प्रभाव से असंभव कार्य संभव हो गया। में यही आशीर्वाद चाहता हूं कि जनसेवक बनकर जनता की सेवा कर सके मुझे माता-पिता ने संस्कार दिए। णमोकार मंत्र दुनिया का सबसे बड़ा मंत्र है जिसमें अनंत सिद्ध अरिहंत भगवान साधुऔ को नमस्कार किया है णमोकार मंत्र के जाप से अनेक संकट टल जाते हैं समाज के पुण्य से संत चलकर उनके दरवाजे उनके नगर में पैदल चलकर आते हैं में एक राजनेता नहीं होकर सामान्य श्रावक समाज का व्यक्ति हूं। यह उद्बोधन पंजाब के महामहिम राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने प्रथमा चार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव में मुख्य अतिथि ने व्यक्त किये।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने शांति नगर में धर्म सभा में बताया कि यह वर्ष महानायक, महाश्रमण ,महापुरुष प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का है उनका व्यक्तित्व ऐसा है कि उनका जितना भी गुणानुवाद किया जाए उसके लिए दिन, माह वर्ष भी कम होंगे । आदिनाथ भगवान सहित सभी तीर्थंकर भगवानों ने रत्नत्रय धर्म का प्रवर्तन किया जो धर्म को धारण करते हैं वही धर्म का प्रवर्तन करते हैं। जिन्होंने धर्म को धारण किया वह भविष्य के सिद्ध बने। जिस प्रकार प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान है, प्रथम आहार दान दाता राजा श्रेयांश है उसी प्रकार प्रथम आचार्य शांति सागर महाराज श्रमण परंपरा के हैं ।आचार्य शांति सागर जी को दक्षिण से उत्तर की तीर्थ वंदना प्रतापगढ़ के जवेरी परिवार द्वारा कराई गई यही नहीं मोतीलाल जवेरी जी ने भी द्वितीय पट्टाघीश आचार्य श्री शिव सागर जी से दीक्षा लेकर मुनि सुबुद्धि सागर जी बने आचार्य श्री ने 72 कला के अंतर्गत व्याख्या कर बताया कि कला अनेक प्रकार की होती है मगर इसमें जीवन और मृत्यु की कला व्यक्ति को आना चाहिए यह कला धर्म के प्रति उत्साह , आनंद और भक्ति से प्राप्त होती है संसारी प्राणी को जीवन में धर्म को उतारना सीखना चाहिए धर्म उत्साह आनंद और जागृत रहकर उमंग भक्ति के साथ होता है।दिगंबर जैन दशा हूंमड समाज के अध्यक्ष जयंतीलाल कोठारी तथा वर्षायोग एवं आचार्य पद प्रतिष्ठापना महोत्सव समिति के अध्यक्ष ऋषभ पचौरी प्रवीण जैन के अनुसार तीन दिवसीय कार्यक्रम में संपूर्ण भारत से अनेक धार्मिक , सामाजिक महत्वपूर्ण पदाधिकारीयों को आमंत्रित किया गया है। वहीं राजनीतिक दृष्टिकोण से लोग अनेक राजनेताओं को भी आमंत्रित किया गया है।दिनांक 14 अक्टूबर को प्रातः श्रुत प्रभावना जिनवाणी का जुलूस श्री जी का पंचामृत अभिषेक, शांति धारा के पश्चात श्रुत अलंकरण समारोह हुआ जिसमें ग्रीष्मा जैन इंदौर के द्वारा नृत्य की प्रस्तुति के साथ स्कंध जिनवाणी की पूजन की गई । जुलूस का समापन श्री शांति सागर मंडप में हुआ पूर्वाचार्यों के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन महावीर बोहरा ,भागचंद चूड़ीवालअसम सतीश पाटील समडोली द्वारा किया गया। मंगलाचरण श्रीमती तारा देवी सेठी द्वारा किया गया आचार्य श्री शांति सागर गौरव गाथा पोस्टर का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया आचार्य शांति सागर जी के जीवन पर आधारित फिल्म का ट्रेलर दिखाया गया।आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनिश्री अपूर्व सागर जी एवं मुनि श्री पुण्य सागर जी के प्रवचन हुए दोपहर को पंजाब के राज्यपाल महामहिम गुलाबचंद कटारिया का शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम में आगमन हुआ आपने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया । विनियांजलि सभा के पश्चात दोपहर को जिनवाणी 100 नगरों के विभिन्न मंदिरों में 100 -100 शास्त्र आलमारी भेंट किए गये ।विनयांजलि सभा और सम्मान सभा आयोजित हुई। रात्रि में श्रीजी की आरती के बाद रूपेश जैन इंदौर के द्वारा सांस्कृतिक भजन संध्या का आनंद सभी ने नृत्य भक्ति से लिया। राजेश पंचोलीया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
