करते है मेरे गुरुवर मेरा नाम हो रहा है …..अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जीअंतर्मना साधना से प्रेरित श्रावक पर चढ़ा साधना का रंग

धर्म

करते है मेरे गुरुवर मेरा नाम हो रहा है …..अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर जीअंतर्मना साधना से प्रेरित श्रावक पर चढ़ा साधना का रंग

सोनकच्छ /गाजियाबाद/औरंगाबाद।

जिंदगी में पुण्य को बढ़ाओ क्योंकि अभी आप का पुण्य सुई की नोक के बराबर भी नहीं हैं। जिस पुण्य पर आप अभिमान करते हो वो कब पाप में बदल जाए पता नहीं है। इसलिए में कहता हु पुण्य कार्य कर सको तो बहुत अच्छा है। पुण्य कार्य नहीं कर पाओ तो चलेगा लेकिन पाप से जितना बच सको अच्छा है…

 

 

यह बात भारत गौरव अंतर्मना आचार्य श्री १०८ प्रसन्न सागर जी महाराज ने ससंघ के साथ श्री तरूणसागरम् पार्श्वनाथ धाम, जिला-गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के धर्म परिसर में उपस्थित भक्तों से कही . उन्होंने कहां की आप मेरे दर्शन करने नहीं आ रहे हो आप वीतरागी व तपस्वी मुद्रा के दर्शन करने आते हो । तो उनकी तपस्या देख अपना जैनत्व धर्म अंगीकार करो। आज हमारे सारे शिष्य उपवास में लगातार संलग्न है। इसीलिए में कहता हूं करते हे मेरे गुरुवर मेरा नाम हो रहा है।

 

जीवन में पुण्य कार्य व्रत उपवास नहीं कर सको तो कोई बात नहीं लेकिन उनकी अनुमोदना जरूर कर लेना आप पुण्य के भागी तो बन ही जाओगे। अंतर्मना संघ तो व्रत उपवास में लगा ही हुआ हे साथ में श्रावक भी पीछे नहीं है चातुर्मास काल में कई भक्त भी इस पुण्य कार्य में सहयोगी बन रहे हैं मै उनके व देश के समस्त जैन संत व श्रावक जो पूरे मन श्रद्धा भाव से व्रत उपवास कर रहे है में इस कार्य की अनुमोदना करता हु।

   
*तपस्वी आचार्य के साधक शिष्य:–*
तरुणसागरम तीर्थ, दिल्ली में  अंतर्मना गुरुदेव आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज एवं ससंघ का के साथ भाद्रपद महीने में व्रतों की साधना में अब भक्त भी शामिल हुए जहां अंतर्मना संघ मै कर रहे सभी साधुओं के व्रतों का संक्षिप्त परिचय आप से साझा करते है
अंतर्मना तपाचार्य श्री प्रसन्नसागरजी महाराज *नंदीश्वर पंक्ति व्रत कर्ता (76 दिन का, 56 उपवास 20 पारणा)*
उपाध्याय मुनि श्री पीयूषसागरजी महाराज
*मुरजमध्य व्रत कर्ता (33 दिन में 26 उपवास 7 पारणा)*
 क्षुल्लिका वचन प्रभा माताजी
*कलैंडर वर्ष 2025 में कुल 75 उपवास का संकल्प*
प्रवर्तक मुनि श्री सहज सागर जी ( साथ ही रस परित्याग व्रत, 10 हरी एक दिन में, वृत्ति परिसंख्यान के नियम के साथ,गुरुवार को एक अन्न)
निर्यापक मुनि श्री नवपद्म सागर जी महाराज
*भक्तामर व्रत* आर्यिका ज्ञानप्रभा माताजी
*दर्शन विशुद्धि व्रत* (48 दिन का 24 उपवास 24 आहार, एकांतर से) मुनि श्री अप्रमत्त सागर जी
*सोलह कारण व्रत( एक आहार एक उपवास)*
आर्यिका चरित्र प्रभा माताजी चातुर्मास में रस परित्याग व्रत  क्षुल्लक श्री नैगमसागरजी महाराज (साथ ही नमक चीनी का त्याग)  क्षुल्लक श्री अर्घसागरजी महाराज (साथ ही रस परित्याग व्रत,आहार में सीमित चीजें,चातुर्मास का पूरा मौन) क्षुल्लिका व्रतप्रभा , धर्मप्रभा ,तपप्रभा माताजी *चारित्र शुद्धि व्रत(एक आहार एक उपवास)*  मुनिश्री परिमलसागर जी महाराज ,आर्यिका पुण्यप्रभा माताजी क्षुल्लक श्री अन्वयसागर जी महाराज *अष्टमी चतुर्दशी व्रत*
*अंतर्मना की साधना से प्रेरित भक्त
 श्रावक श्रेष्ठी व्रत कर्ता*
*नंदीश्वर पंक्ति व्रत( 76दिन , 56उपवास 20 पारणा)*
श्रीमती साधना जैन,मैनपुरी *32 उपवास की साधना* श्रीमती प्रमिला जैन, हैदराबाद
श्रीमती रेणु जैन, हैदराबाद
श्रीमती रमिला जैन, हैदराबाद *सोलह कारण(एक उपवास एक आहार)* श्री मनोज चौधरी, हैदराबाद
    (सभी छह रस का त्याग के
     साथ) श्री वरुण जैन, सूरजमल
     विहार, दिल्ली श्री प्रशांत जैन, इंदिरापुरम,
     गाजियाबाद

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद रोमिल जैन सोनकच्छ से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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